उदयपुर/ खरसाण. मृत्यु पर्यंत शव के अंतिम संस्कार को लेकर इन गांवों में 'बरसाती बाधाÓ चिंता की वजह बनी हुई है। यानी की बरसात के दिनों में गांव में होने वाली मौतों के अंतिम संस्कार को लेकर श्मशान की सुविधा नहीं है। इससे बरसात के दिनों में होने वाली मौतों को लेकर दाह संस्कार के लिए ग्रामीणों को परेशानी होती है। मजबूरी के बीच ग्रामीणों की ओर से त्रिपाल की अतिरिक्त व्यवस्था कर समस्या का अस्थायी समाधान अलग से करना होता है। ग्राम पंचायत बगड़ के मनोहरपुरा, रावतपुरा , रेबारियों कि ढाणी सहित अन्य गांवों में ग्राम पंचायत की उदासीनता से श्मशान जैसी सुविधा भी नहीं है। ग्रामीणों के स्तर पर शिकायतों के बावजूद ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने कभी समस्या के समाधान को लेकर चिंता नहीं जताई। समस्याएं हैं कि इतने तक सीमित नहीं है। श्मशान मार्ग कांटों से घिरा होने के साथ ही संकरा है। बीते चार साल में श्मशान के नाम पर एक रुपया खर्च नहीं करने के आरोप भी जोर पकड़ रहे हैं।
बिलानाम या खातेदारी!
ग्राम पंचायत ने कहा कि हमें नहीं पता कि श्मशान की जमीन कहां है। पहले तो श्मशान को खातेदारी की जमीन पर होना बताया। बाद में इनकार किया। दूसरी ओर ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के खाते में बहुत से बिलानाम जमीन है। पंचायत चाहती तो ऐसा संभव होता।
पता नहीं है श्मशान
हमारी जानकारी में नहीं है कि वहां पर कोई श्मशान है। संबंधित जमीन खातेदारी में बोल रही है। वहां श्मशान बनाना कैसे संभव है।
चंपालाल शर्मा, ग्राम पंचायत बगड़
जुटाते हैं जानकारी
जमीन निजी खाते में है या सरकारी ये पता लगाते हैं। मुझे बहुत लंबा समय नहीं हुआ है। इसलिए क्षेत्र विशेष की जानकारी नहीं है। बिलानाम जमीन हुई तो ग्राम पंचायत से आवश्यक निर्माण कराया जाएगा।
भूपेश, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत बगड़





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