भुवनेश पण्ड्या
उदयपुर . बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में विभिन्न कारणों से 53 दिन में 81 नवजातों की मौत के मामले में हाइकोर्ट ने प्रदेश के सभी लेबर रूम, पीएचसी व सीएचसी की जांच के आदेश दिए थे। इस क्रम में बुधवार को यहां जनाना हॉस्पिटल का मजिस्ट्रट दल ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जजों ने यह सवाल उठाया कि जनाना हॉस्पिटल की जर्जर इमारत पर कैसे बगैर सोचे-समझे पूरा नया भवन खड़ा कर दिया। जजों के दल ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार के करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी ऊपरी मंजिल का पूरा उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया गया है। वे इसकी रिपोर्ट तैयार कर हाइकोर्ट भेजेंगे।
निरीक्षण के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रिद्धिमा शर्मा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बृजेन्द्र रावत बुधवार सुबह चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने चिकित्सकों के उपस्थिति रजिस्टर जांचे, एएनएम व नर्सेज स्टाफ के बारे में जानकारी ली। वाटर कूलर एवं पर्याप्त कक्ष की उपलब्धता परखी। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं, लेबर रूम की व्यवस्थाओं एवं साफ सफाई, स्टरलाइजेशन व सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की गई। करीब दो घंटे तक दल ने हॉस्पिटल के चप्पे चप्पे का गंभीरता से निरीक्षण किया। जनाना चिकित्सालय की अधीक्षक डॉ मधुबाला चौहान से दल को बताया कि पुराने भवन का उपयोग नहीं हो पाने के बारे में जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि करीब एक वर्ष से जनाना चिकित्सलय पांच अलग -अलग जगह चलाया जा रहा है।





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