उदयपुर/ झाड़ोल. कहने को उदयपुर में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग है। यानी जनजातियों को उनके हिस्से के हर हक को दिलाने के लिए यह महकमा पूरी तरह जिम्मेदार है, लेकिन प्रदेश की जिम्मेदारी निभाने के दावे करने वाले ओहदेदारों की हकीकत यह है कि उनकी नाक के नीचे जनजाति विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। प्रतिनियुक्ति की आड़ में स्थानीय जिला प्रशासन राजकीय स्कूल के शिक्षकों व व्याख्याता को बाबू बनाकर उनके मूल शैक्षणिक कार्य में बाधा बन रहा है। ऐसा ही एक उदाहरण झाड़ोल उपखण्ड मुख्यालय पर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में सामने आया है। संकाय व्याख्याताओं की कमी के बीच यहां के एक मात्र गणित व्याख्याता प्रतिनियुक्ति पर जिला कलक्टर कार्यालय लगाया गया है। हाल ही में स्कूल खुलने के साथ ही कलक्टर के आदेश गणित व्याख्याता समीश कुमार वया ने कलक्टर कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर जोइनिंग दी है। ऐसे में विज्ञान के विद्यार्थियों के इंजीनियर बनने की चाह पर ग्रहण लग गया है।
एक विद्यालय, तीन संकाय
उपखण्ड मुख्यालय झाड़ोल की बात करें तो यहां के एक मात्र विद्यालय में तीन वर्ष से कला के साथ विज्ञान व वाणिज्य संकायों का संचालन हो रहा है। लेकिन, कला संकाय में हिन्दी साहित्य के व्याख्याता का पद एक फरवरी 2019 से रिक्त है। वैकल्पिक व्यवस्था में द्वितीय श्रेणी के शिक्षक कालांश ले रहे हैं। इस तरह कृषि विज्ञान व्याख्याता का पद जुलाई 2017 से, लैब टेक्निशियन के सभी तीन पद वर्ष 2015 से, प्रयोगशाला सहायक तृतीय श्रेणी का एक पद जुलाई 2015 से रिक्त है। इसी तरह सहायक प्रशासनिक अधिकारी, कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के रिक्त पदों के चलते शिक्षक ही बाबूगिरी करने को विवश हैं।
कार्यवाहक ने किया कार्यमुक्त
मैं अवकाश पर थी। कार्यवाहक प्राचार्य ने गणित व्याख्याता को प्रतिनियुक्ति आदेश पर कार्यमुक्त किया था। अन्य रिक्त पदों के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जा चुका है।
पुजा सहारण, प्रधानाचार्य, राउमावि झाड़ोल





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