भुवनेश पण्ड्या
उदयपुर . आरएनटी मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के अधीन सोनोग्राफी सेक्शन में अव्यवस्थाओं को लेकर राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर के बाद गठित दो दो वरिष्ठ चिकित्सकों की समिति की रिपोर्ट गोल कर दी गई है। कॉलेज प्रशासन ने अपनी खाल बचाने के लिए रिपोर्ट को दबा दिया है। अब प्राचार्य दलील दे रहे हैं कि मामले में निर्णय लेने के लिए अब दस सदस्यीय कमेटी बनाई गई है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने १ मई २०१९ के अंक में ‘सोनोग्राफी जांच की कतारों में कराहते मरीज’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इस पर हॉस्पिटल अधीक्षक ने डॉ आरएल मीणा और उप अधीक्षक डॉ रमेश जोशी की कमेटी गठित कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर अधीक्षक के माध्यम से १० मई को इसे प्राचार्य तक भेजी, लेकिन दो माह गुजरने के बाद भी अब तक कुछ नहीं हुआ। उल्टे प्राचार्य खुद इसे नकारते दिख रहे हैं।
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ये दिया था रिपोर्ट में
- विभाग में ७ में से २ मशीन पर सोनोग्राफी हो रही थी। एक मशीन ग्रे स्केल पर प्रथम वर्ष रेजिडेंट चिकित्सक काम कर रहे थे, तो दूसरी कलर्ड डोपलर पर तृतीय वर्ष रेजिडेंट चिकित्सक कार्यरत थे। शेष चार मशीनों पर कोई चिकित्सक नहीं मिला।
- एक चिकित्साधिकारी को पूरे माह एमएलसी कार्य में लगाया हुआ था। जांच के समय उसके पास किसी प्रकार का कोई काम नहीं था।
- एक चिकित्साधिकारी विभाग में एेसे ही घूमते हुए मिले, जिनके पास कोई काम नहीं था।
- विभागाध्यक्ष डॉ एनके कर्दम विभाग में नहीं थे। जानकारी मिली कि वे कॉलेज में हॉस्टल संबंधी कार्य से गए हुए थे। (डॉ कर्दम मुख्य प्रतिपालक का कार्य देख रहे हैं।)
- सहायक प्राध्यापक डॉ कुशाल गहलोत विभाग के एक कमरे में कुछ लोगों से किसी विषय पर चर्चा में व्यस्त थे। कमेटी को बड़ी मुश्किल से बाद में उनका पक्ष फोन पर जानना पड़ा।
- सहायक प्राध्यापक डॉ रामबीरसिंह कहां थे और किस प्रकार का कार्य करते हैं, कोई भी सूचना देने में समर्थ नहीं था। अपुष्ट सूचनाओं से पता चला कि वे केवल हस्ताक्षर करने आते हैं।
- विभाग में वर्षों से जमे पेरा मेडिकल स्टाफ द्वारा प्रतीक्षा सूची में अपने परिचित मरीजों की सोनोग्राफी के लिए चिकित्सकों पर दबाव बनाने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
- जिस मरीज के साथ कोई नहीं, उसे कई-कई बार चक्कर कटवाना, कतार में होने के बावजूद समय पूरा होने पर सोनोग्राफी के लिए मना करना, शेष रहे मरीजों एवं आपात स्थिति वाले मरीजों के लिए स्पष्ट नीति नहीं होने के कारण मरीजों में आक्रोश बढ़ा है।
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ये दिए सुझाव
- विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों का अहम व वर्षों से उदासीन व नकारात्मक रवैया इस समस्या की मूल जड़ है।
- सोनोग्राफी कार्य को पूर्ण प्राथमिकता देते हुए अपोइंटमेंट की नीति स्पष्ट होनी चाहिए। दीर्घकालीन समय के लिए परमानेंट फेकल्टी की स्थापना होनी जरूरी।
- गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए २ यूएसजी मशीन प्रतिदिन संचालित किए जाने की आवश्यकता है।
- वर्तमान की आवश्यकता को देखते हुए न्यूनतम चार मशीनों पर गे्र स्केल सोनोग्राफी करना जरूरी है। पीजी विद्यार्थियों की संख्या देखते हुए फेकल्टी गाइड की स्थापना की जरूरत है।
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रिपोर्ट मिली थी, लेकिन दस सदस्यीय चिकित्सक दल तय करेगा कि उसका क्या करना है, इसलिए इसे रोका गया है। मीडिया में जो समाचार लगातार आते रहते हैं, इसे लेकर ये दल बनाया है। मैं कल आपकों पूरे दल की जानकारी दे दूंगा।
डॉ डीपी सिंह, प्राचार्य आरएनटी मेडिकल कॉलेज





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