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बड़ा सवाल! क्या इस बार यहां आ पाएगा उजियारा

कोटा.

सरकार शिक्षा को लेकर भले ही लाख जतन कर रही लेकिन कई वाकई ऐसी समस्याएं हैं जिनका हल शायद शिक्षा अफसरों के पास भी नहीं। गरीबी व रोजगार भी इनमें से एक है। शिक्षकों के मैराथन प्रयासों के बाद भी जमीन पर यह बच्चों को स्कूल से जोड़ृने में आड़े आ रही। और, विभागीय अफसरों के पास इसका कोई हल भी नहीं। नतीजा यह कि इसके चलते कई सरकारी प्रोत्साहनों से ये ब्लॉक वंचित रह जाते हैं। यहां हम बताने जा रहे हैं कोटा जिले के समीपवर्ती रावतभाटा ब्लॉक की ऐसी ही कहानी।
यहां स्कूलों में प्रवेश दिलाने के बाद बच्चे अपने माता पिता के साथ तीन माह तक मजदूरी पर चले जाते हैं। अत: वे ड्रॉप आउट हो जाते हैं। ऐसे में उपखंड की सभी 25 पंचायतों को 'उजियाराÓ घोषित करने में दिक्कतें आ रही हैं। इस वर्ष भी अब तक मात्र 5 पंचायतों के आवेदन आए हैं, जबकि ब्लॉक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने 18 पंचायतों को उजियारा घोषित करने का लक्ष्य तय किया है।
राजस्थान सरकार की मंशा है कि प्रदेश में एक भी बच्चा या व्यक्ति अशिक्षित नहीं रहे। इसको लेकर अनामांकित व ड्रॉप आउट छात्र-छात्राओं को स्कूल से जोडऩे के आदेश हैं। जिन पंचायत में एक भी ड्रॉप आउट व अनामांकित बच्चा नहीं रहेगा, उसे 'उजियाराÓ पंचायत घोषित किया जाएगा। उस पंचायत को 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया जाएगा। ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने सभी पंचायतों के पीईईओ को अपनी पंचायतों के अधीन आने वाले ड्रॉप आउट व अनामांकित बच्चों को स्कूल से जोडऩे के आदेश जारी किए हैं। सभी बच्चों को स्कूल से जोडऩे के बाद पीईईओ को 'उजियाराÓ के लिए आवेदन करने को कहा है। इसके तहत प्रत्येक स्कूल के शिक्षक घर-घर जाकर ड्रॉप आउट व अनाकित बच्चों को स्कूल से जोड़ रहे हैं। यही नहीं, नामांकित बच्चों के नाम व घर का पता शिक्षकों को रजिस्टर में लिखना पड़ रहा है।

ये आ रही दिक्कतें
ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि 11 पंचायतों में आदिवासी ज्यादा हैं। ये खेती व मजदूरी के कारण तीन-तीन माह तक घरों से बाहर रहते हैं। साथ में बच्चों को भी लेकर चले जाते हैं। अन्य पंचायतों में भी काफी गरीब लोग रहते हैं। वे भी कई महीनों मजदूरी के लिए घरों से बाहर रहते हैं। नजदीकी स्कूल के शिक्षक जैसे तैसे परिजनों को समझाकर बच्चे को जोड़ तो देेते हैं लेकिन कुछ दिन बाद बच्चे माता-पिता के साथ मजदूरी पर चले जाते हैं। नतीजा, गत वर्ष एक भी पंचायत उजियारा घोषित नहीं हुई।

यह है प्रक्रिया

ड्रॉप आउट या अनामांकित बच्चा नहीं रहने पर पीईईओ को आवेदन करना है। सत्यापन 13 अगस्त तक किया जाएगा। जिला स्तरीय सत्यापन 27 अगस्त को किया जाएगा। 30 सितम्बर को जिला निष्पादन समिति की बैठक में अनुमोदन के बाद 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर ऐसी पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा।

कोशिश करेंगे
मामले में ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी, रावतभाटा पीएल बैरवा भी खुद मानते हैं कि ज्यादातर पंचायतों में लोग मजदूरी करने तीन-तीन माह तक घरों से बाहर चले जाते हैं। इस कारण पंचायतों को 'उजियाराÓ घोषित करने में दिक्कत आ रही है। लेकिन वे दृढ़ता से कहते हैं कि इस साल 18 पंचायतों को उजियारा घोषित करने का उन्होंने लक्ष्य लिया है। लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।



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