उदयपुर. सभी धर्म की उपासना पद्वति में भगवान, संत और ग्रंथ अलग-अलग होने के बाद भी सेवा धर्म को सभी ने एक स्वर में स्वीकार किया है। निष्काम निस्वार्थ सेवा करके ही हनुमानजी, भगवान रूप में विश्व बंदिनी पूजनीय बने। ये विचार राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश ने भुवाणा स्थित हिम्मतसिंह भंडारी जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे। मुनि ने कहा कि दान, शील, तप और त्याग से बढ़कर कठिन है सेवा धर्म। प्राणी मात्र में आत्मा रूपी परमात्मा विराजमान है। प्रत्येक प्राणी को परमात्मा का रूप मानकर समर्पित भाव से अंत:करण पूर्वक सेवा करें तो देवता भी उसके चरणों में नतमस्तक होते हैं। मुनि कमलेश ने कहा कि सेवा को अनदेखा करके भक्ति तीर्थ करना मुर्दे को शृंगार कराने के समान है। परमात्मा मंदिर मस्जिद में कहने को हैं। उनका निवास तो दीन हीन पीडि़त आत्माओं के अंदर हैं। मुनि कमलेश के बताए कि असहाय और पीडि़त व्यक्ति कहराता रहे और हम परमात्मा में लीन होने का ढोंग करते रहे तो आत्मा और परमात्मा के साथ इससे बड़ा धोखा नहीं हो सकता। बिना किसी भेदभाव के सेवा को अपनाना अत्यंत कठिन और दुर्लभ है। भोपाल सिंह भंडारी, गणपत भंडारी, भूपेंद्र भंडारी, ललिता बाफना, ममता राका, अनिता भंडारी एवं अन्य ने यहां उपस्थिति दी।





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