जोधपुर. इसे बारिश के सीजन में एक बार चख लंे तो बार-बार दिल कहता है वन्स मोर। जी हां, बारिश का सीजन आ चुका है। इस मौसम में जोधपुर में कोई मिर्ची बड़ा खाए बिना नहीं रह सकता। इन दिनों ब्लूसिटी में इस मशहूर लज्जतदार नमकीन की बिक्री बूम पर है। हर रोज ७५ हजार से अधिक बिकने वाले मिर्ची बड़े इन दिनों एक लाख के आसपास विक्रय हो रहे हैं। मिर्ची बड़े के व्यापारियों में भी बारिश के सीजन में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
शहर में एक हजार से अधिक दुकानें
शहर में इन दिनों 1 हजार से अधिक नमकीन की दुकानों में मिर्ची बड़े के विशेषज्ञ बताए जा रहे हैं। जिसमें 70-80 परंपरागत दुकानें है, जहां पर मिर्ची बड़ा खरीदने वाले लोगों की सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। इसके अलावा आजकल शहर में कदम-कदम पर मिर्ची बड़े की दुकानें चल रही हैं। अब तो नई दुकानें भी खुल गई हैं।
सिर्फ मिर्ची बड़े के भरोसे बिजनेस
कई दुकानदार केवल मिर्ची व अन्य नमकीन के भरोसे ही अपना बिजनेस चला रहे हैं। इसके अलावा मिष्ठान भण्डारों की दुकानों पर भी मिर्ची बड़ा जम कर बिकता हुआ देखा जा रहा है। आजकल आकाश में बादल मंडराते ही लोग मिर्ची बड़ा दुकानों की रुख कर लेते हैं।
मिर्ची बड़ा बढ़ा रहा इनकी आमदनी
मिर्ची बड़े के कारण शहर में हरी मिर्ची, मसाले, तेल, बेसन व ब्रेड के व्यापारियों की ाी चांदी कम नहीं हो रही है। यों कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस मौसम में मिर्ची बड़े में डाले जाने वाली सहायक खाद्य सामग्री की भी मिर्ची बड़े के कारण जम कर खपत हो रही है।
विदेशों में जाता है जोधपुर का मिर्ची बड़ा
शहर के कई लोग विदेश जाकर बस चुके हैं, एेसे में वे जोधपुर आने के दौरान यहां मिर्ची बड़ा खाए बिना नहीं रहते। साथ ही जोधपुर से विदेश लौटने पर वे अपने साथ मिर्ची बड़ा जरूर ले जाते है। कई लोग जान-पहचान वालों के साथ भी जोधपुर का मिर्ची बड़ा मंगवा कर खाते हैं।
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है आंकड़ा
जोधपुर में मिर्ची बड़ा परपंरागत फूड और अमीर गरीब सभी में लोकप्रिय व्यंजन है। कई लोग तो हर रोज सुबह नाश्ते में इसका सेवन करते हैं। बरसात के सीजन में इसका विशेष चाव रहता है। शहर के सभी प्रतिष्ठानों पर 75 हजार से अधिक मिर्ची बड़े बिक जाते हैं। बारिश के दिनों में यह आंकड़ा बढ़ जाता है।
- गोपीकिशन, व्यापारी
जितने मिर्ची बड़े तलें, उतने कम
जोधपुर की विशेष पहचान है मिर्ची बड़ा। बड़ी बात यह है कि इसका बिजनैस करने वाले लोग भी हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रहते, विशेषकर जोधपुर में तो यही हाल है। बारिश के सीजन में तो जितने मिर्ची बड़े निकालें, उतने कम हैं।
- अनिल अग्रवाल, व्यापारी





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