पाली . सोजत व जैतारण क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली मेहंदी की फसल इन दिनों लट की चपेट में आ गई है। सेमीलूपर नामक यह लट मेहंदी की पत्तियों को खा रही है। इससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसके प्रकोप के चलते मेहंदी की फसल बोने वाले हजारों किसान चिंतित हो उठे है। जबकि, इस व्यापारिक फसल को उगाने के लिए किसानों को लाखों रुपए खर्च करने पड़े हैं।
पाली जिले के सोजत, मारवाड़ जंक्शन, रायपुर व जैतारण तहसील में 40 हजार हैक्टेयर में मेहन्दी की फसल खड़ी है। इस लट की बीमारी से करीब 30 हजार किसान प्रभावित हैं। खास बात ये है कि निराई गुड़ाई में ही किसानों के लाखों रुपए खर्च हो चुके है। अनुमानित रूप से एक किसान ने एक हैक्टेयर से 10 हैक्टेयर में मेहंदी की फसल उगा रखी है।
उद्यान विभाग दे रहा नसीहत
उद्यान विभाग के अधिकारी सेमीलूपर नामक लट के उपचार के लिए किसानों को फसल पर क्यूनोलफॉस 25 इ.सी. एक व डेढ़ लीटर 500 से 700 लीटर पानी में घोल कर स्प्रे करने की सलाह दे रहे है। कोई किसान स्प्रे नहीं करना चाहता है तो क्यूनॉलफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 20 से 25 किलोग्राम का एक बैग एक हैक्टयर में भुरकाव कर सकते है। उनके मुताबिक हाथ से स्प्रे करना ज्यादा लाभकारी साबित होगा।
विदेशों तक है सोजत की मेहंदी की धाक
देखा जाए तो एक हैक्टेयर में चार से छह क्विंटल तक मेहन्दी की पैदावार होती है। इन दिनों बाजार में 3500 से 4100 रुपए (मण) प्रति 40 किलोग्राम के मेहन्दी के दाम चल रहे है। जिले में सालाना करीब 24 हजार मैट्रिक टन मेहन्दी का उत्पादन होता
किसानों पर दोहरी मार
पहले मेहन्दी की फसल में किसी प्रकार का रोग नहीं लगता था। दवाई का स्प्रे करने से मेहन्दी का पौध सूख कर खराब हो जाता है। किसान मेहन्दी में 500 से 600 रुपए देकर निराई गुड़ाई करता है। 1000 से 1200 रुपए देकर मेहन्दी की कटाई कराता है। लट की बीमारी लगने से ये घाटे का सौदा साबित हो रही है।
श्रवण कुमार गुर्जर, किसान, धारेश्वर स्टेशन
मेहन्दी की फसल में (सेमीलूपर) लट की बीमारी लगी है। किसानों को दवाई का स्प्रे की सलाह दे रहे है। पहले लट की बीमारी नहीं होती थी। पिछले 10 सालों में ही लट की बीमारी लगी है।
रामाअवतार, सहायक निदेशक, उद्यान विभाग पाली





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