जोधपुर. करोगे याद तो हर बात याद आएगी, गुजरते वक्त की हर मौज ठहर जाएगी...। हिन्दी फिल्म जगत के मशहूर संगीत निर्देशक खय्याम ( Khayyam ) का दुनिया से रुखसत होना संगीत जगत की अपूरणीय क्षति है। उनका दिलकश संगीत और सदाबहार धुनें, संगीत के कद्रदान लोगों के दिलों पर राज करता है। उनका जोधपुर और जोधपुर के कुछ फनकारों के साथ करीब का रिश्ता रहा है। बाजार फिल्म के इस नगमे की तरह जोधपुर के फनकारों ( artists ) और उनके चाहने वालों की उनसे जुड़ी बहुत सी बातें और यादें ताजा हो उठी हैं। कुछ फनकार तो एेसे भी हैं जिन्होंने उनके साथ काम किया तो कुछ फनकार उनके नजदीक भी रहे। वहीं एेसे फनकार भी हैं, जो उनसे मिल तो न सके, लेकिन उनके संगीत के दीवाने हैं। खय्याम के चले जाने से संगीत की दुनिया( music news ) में वीरानी छाई हुई है।
खय्याम और सुल्तान खां
जिन्दगी जब भी तेरी बज्म में लाती है हमें, ये जमीं चांद से बेहतर नजऱ आती है हमें..। अगर हम हिन्दी सिनेमा की एेतिहासिक फिल्म उमराव जान की बात करें तो खय्याम ने संगीत निर्देशन किया तो था तो उसमें सारंगीवादन जोधपुर के सारंगीनवाज सुल्तान खां ने किया था। शहरयार के लिखे इस फिल्म के गीत आज भी जब लोगों की जुबान पर आते हैं तो हम खय्याम और सुल्तान खां की जोड़ी को नहीं भूल सकते। यानी जोधपुर के सुल्तान खां का नाम उमराव जान और खय्याम के साथ हमेशा वाबस्ता रहेगा।
-फनकारों और कद्रदानों की नजर में खय्याम-
जन्म दिन आज भी याद है
वो बेमिसाल, नेक दिल इंसान और फरिश्ते थे। खय्याम के गीत गजल व नज्में शास्त्रीय होते हुए भी बहुत सरल रहे। उन्होंने राग पहाड़ी में बहुत गाने बनाए। उनके साथ मुंबई में दो बार कुछ सुनहरे लम्हे बिताने का मौका मिला था। मुझे २०१८ का वह दिन आज भी याद है जब मुंबई में उनके जन्म दिन पर गाना गाने का मौका मिला था।
-ए के व्यास, फिल्मी गायक,जोधपुर
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खय्याम ने रिलीज की थी सीडी
अनुराधा आट्र्स के बैनर पर मेरी सीडी ‘मुद्दतें गुजरी हैं’ खय्याम साहब ने रिलीज की थी। उनसे उस वक्त मुलाकात हुई थी। बहुत मिलनसार, जिंदादिल और बेमिसाल इंसान थे।
-एन के मेहता, लेखक व पूर्व उप निदेशक शिक्षा विभाग, जोधपुर
संगीत में भारतीयता की झलक
खय्याम लाजवाब शख्सियत थे और उनका संगीत भी लाजवाब था। उनकी धुनें मौलिक हैं और आज भी दिल को छू जाती थीं। एक खास बात और कि उनके संगीत में भारतीयता की झलक होती थी।
-पंडित रामचंद्र गोयल,शास्त्रीय गायक, जोधपुर
संगीत जगत के माइल स्टोन
खय्याम का संगीत बेमिसाल था। उनकी धुनें दिलों को छू जाती थीं। बाजार और उमराव जान का संगीत कौन भूल सकता है? वो संगीत जगत के माइल स्टोन थे।
-मुकुंद क्षीरसागर
शास्त्रीय संगीतकार, जोधपुर
संगीत सुकून देता है
फ्यूजन और रीमिक्स के इस दौर में जब संगीत में मौलिकता कम नजर आती है। एेसे में खय्याम का संगीत हमें बहुत सुकून और ताजगी देता है। उनका संगीत अमर था और अमर है।
-रुद्र शर्मा,एलबम सिंगर, जोधपुर





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