बीकानेर. किसी समय फुटबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर बीकानेर की पहचान थी, आज प्रदेश स्तर पर यह खेल अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। ना कोई संगठन, ना कोई अकादमी। एेसे में राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के खिलाड़ी की पहुंच ना के बराबर रह गई है। साइक्लिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई खिलाड़ी दे चुके बीकानेर में अब साइकिल वेलोड्रम तक नहीं बचा। फिर भी नए खिलाड़ी सड़कों पर साइकिल दौड़ाकर जैसे-तैसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं। तीरंदाजी की राष्ट्रीय टीम के कोच की जिम्मेदारी बीकानेर के प्रशिक्षक संभाल चुके हैं। पॉवर लिफ्टिंग, वेटलिफ्टिंग सरीखे कुछ एक खेल में भी बीकानेर के खिलाड़ी अपने स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
फुटबॉल का वह स्वर्णिम दौर था....
राजस्थान पुलिस टीम के खिलाड़ी मगन ङ्क्षसह राजवी ने साल १९७१ में भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान की जिम्मेदारी संभाली। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने जकार्ता गोल्ड कप, फुटबॉल आेलम्पिक, मलेशिया में हुए फुटबॉल फेस्टिवल और ७ एशियन गेम्स में भारतीय फुटबॉल टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। अर्जुन पुरस्कार विजेता मगन सिंह राजवी के अनुसार आज फुटबॉल के लिए यहां पर कुछ नहीं है। ना प्रतियोगिताएं हो रही है, ना पर्याप्त व उपयुक्त मैदान है।
एेसे में खिलाड़ी कैसे तैयार होंगे? प्रदेश स्तर पर किसी तरह की अकादमी नहीं है, कोई क्लब नहीं है, जिनमें खिलाड़ी तैयार हो। पहले विभागों की टीमें होती थी। खिलाडियों को राष्ट्रीय स्तर तक खेलने का अवसर मिल जाता था। आज एेसा नहीं है। पहले रेलवे, आरएसी और एजी सरीखे विभागों की टीमें अलग-अलग प्रतियोगिताओं में भाग लेती थी। राजवी ने बताया कि बीकानेर में अभी भी चंद क्लब अपने स्तर पर खिलाडि़यों को प्रशिक्षण दे रहे हंै। सरकारी स्तर पर किसी तरह की सुविधा खिलाडि़यों के लिए नहीं है।
कैसे दौड़ाएं साइकिल
साइक्लिंग खेल में अभी भी बीकानेर को उम्मीद दिखाई दे रही है। हर साल बीकानेर से करीब २५ साइक्लिस्ट राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भागीदारी निभा रहे हैं। दो से तीन खिलाड़ी अन्तरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता मंे खेल रहे हैं। इस खेल के दम पर करीब २०० खिलाड़ी रेलवे में नौकरी कर रहे हैं। वहीं २५ खिलाड़ी भारतीय सेना में और १०० से अधिक खिलाड़ी अन्य विभागों मंे कार्यरत है।
वर्तमान में भारतीय साइक्लिंग टीम के प्रशिक्षण शिविर में बीकानेर के लगभग एक दर्जन खिलाड़ी शामिल है। यह शिविर गुवाहाटी और दिल्ली में चल रहा है। बीकानेर में गुरुदेव साइक्लिंग अकादमी के स्तर पर खिलाडि़यों को साइकिलें व अन्य संसाधन मुहैया कराए जाते हैं। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे श्रवण डूडी व सीएफआई कोच केके पुरोहित नए खिलाड़ी तराश रहे हैं।
अभ्यास के लिए वेलोड्रम नहीं
भारतीय साइक्ंिलग संघ के पूर्व सचिव व प्रशिक्षक किशन कुमार पुरोहित के अनुसार आज बीकानेर के खिलाड़ी राष्ट्रीय ही नहीं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर शहर का नाम रोशन कर रहे हैं, लेकिन यहां पर अभ्यास के लिए किसी तरह का वैलोड्राम नहीं है।
यहां डॉ. करणीसिंह स्टेडियम परिसर का वेलोड्रम लंबे अर्से से दुर्दशा का शिकार हो रखा है। एेसे में खिलाडि़यों को सड़क पर ही अभ्यास करना पड़ता है।
तीरंदाजी के धनुरधर
तीरंदाजी खेल में भी बीकानेर के होनहार धनुरधर राष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहरा रहे हैं। दो खिलाडि़यों ने अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भागीदारी निभाई हैं। चार संस्थाएं खिलाडि़यों को प्रशिक्षित कर रही है। सरकार की ओर से किसी तरह की सुविधा या सहयोग नहीं है। अन्तरराष्ट्रीय प्रशिक्षक अनिल जोशी के अनुसार सरकार के स्तर पर अभ्यास के लिए किसी तरह के मैदान व सामान की व्यवस्था नहीं दी जा रही। खिलाडि़यों को महंगे सामान उपलब्ध नहीं हो पाते। फिर भी अपने बलबूते पर खिलाड़ी पदक ला रहे हैं।
50 राष्ट्रीय खिलाड़ी
बीकानेर में 50 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर के है। इसमें जगदीश चौधरी व श्याम सुंदर स्वामी अन्तरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं मंे भागीदारी निभा चुके हैं। श्याम सुंदर बीते साल जकार्ता व युरोप में खेलने गए। इस साल नीदरलैंड, दुबई में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेकर इलाके का नाम रोशन किया।





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