विजय शर्मा/जयपुर। विजेता प्रत्याशियों ( Rajasthan Student Election Results 2019 ) को सुरक्षित घर तक पहुंचाने की पुलिस की ही जिम्मेदारी होती है। कॉलेज परिसर में हो— हल्ला से बचने के लिए यह परंपरा है। लेकिन महाराजा कॉलेज ( Maharaja Collage ) में पुलिस ने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया। यहां पुलिस का दोहरा चेहरा सामने आया।
काउंटिंग रूम से पुलिस सम्मान पूर्वक विजयी प्रत्याशियों को घर छोडऩे के लिए रवाना हुई। चार पदाधिकारियों में से तीन का घर पास होने के कारण उन्हें तो पुलिस वाहन में छोडऩे गई, लेकिन जैसे ही पता लगा कि उपाध्यक्ष मनीष कुमार नामा का घर सांगानेर हैं, तो पुलिस के कदम ठहर गए। उपाध्यक्ष को घर छोडऩे के लिए पुलिस टालमटोल करने लगी। हद तो तब हो गई कि पुलिस ने उपाध्यक्ष को कैब से घर जाने की सलाह दी। लेकिन उपाध्यक्ष मनीष नामा सम्मान से ही पुलिस के वाहन में घर भिजवाने के लिए गिड़गिड़ाते रहे। इधर लालाकोठी थाना पुलिस बिना वाहन घर भेजने पर अड़ी रही। करीब 20 मिनट तक पुलिस कॉलेज के बाहर उपाध्यक्ष को लेकर खड़ी रही। आखिरकार थानाधिकारी रायसल सिंह के सामने ही एक पुलिसकर्मी ने उपाध्यक्ष की माला और आईडी कार्ड उतरवा कर अखबार में लिपेट दिया और हाथ में दे कर कहा कि अब कोई नहीं पहचानेगा। चल, बस से निकल ले।
5 मिनट पहले हुई थी पुलिस की तारीफ ( Rajasthan Student Election 2019 )
विजयी प्रत्याशियों की घोषणा के बाद सहयोग के लिए काउटिंग रूम में मंच से प्रिंसिपल से पुलिस की तारीफ की थी। पुलिस अधिकारियों के साथ पुलिसकर्मियों को धन्यवाद दिया। पांच मिनट बाद ही पुलिस का यह चेहरा सामने आ गया।
एसएचओ बोले... उसको किसका खतरा था? उपाध्यक्ष ही तो बना है...
इधर लालाकोठी थानाधिकारी रायसल सिंह का कहना है कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था को देखते हुए हम नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को घर तक छोड़ते हैं। मनीष नामा उपाध्यक्ष ही तो बना है उसको किससे खतरा था? वाहन नहीं था नहीं तो मैं मोटरसाइकिल से छोड़ आता। वैसे उसे यूनिवर्सिटी गेट तक छोड़ दिया था, वहां से वह घर निकल गया।





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