Udaipur Weather : Rain in Udaipur धीरेंद्र् कुमार जोशी/उदयपुर. जिले में दो दिन तक लगातार हुई बारिश ( Rain) से जलाशयों ( Lack ) में पानी की आवक तेज हो गई। इधर अब तक खाली पड़े कई जलाशयों में भी पानी की आवक बढ़ गई है। सीसारमा नदी में पानी की अच्छी आवक होने से पिछोला ( Pichola ) झील का जलस्तर देर शाम को बढ़कर 7 फीट के पार हो गया। वही मदार बड़ा और छोटा का जलस्तर भी 16 फीट के पार पहुंच गया है।
जिले में गत दो दिन पूर्व शुरू हुआ बारिश ( Weather ) का दौर शुक्रवार को भी जारी रहा। जलाशयों ( Lack ) के कैचमेंट में बारिश होने से नदी-नालों में पानी की आवक तेज हो गई। इससे जलाशयों का जलस्तर भी तेजी से बढऩे लगा। शहर की प्रमुख झील पिछोला में गत दो दिन में 3 फीट पानी की आवक हुई। देर रात तक इसका जलस्तर 7.4 इंच हो गया। वहीं अन्य जलाशयों में भी पानी की आवक जारी है। शुक्रवार शाम को बारिश बंद होने से पानी की आवक घटना शुरू हो गई। शुक्रवार सुबह से शाम तक जिले के उदयसागर 8, वल्लभनगर 14, बागोलिया 20, गोगुंदा 36, कोटड़ा में 40, उदयपुर 18, नाई 20, मदार में 24 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता विनित शर्मा ने बताया कि पिछोला का जलस्तर आठ फीट होने पर स्वरूप सागर-फतहसागर लिंक नहर से पानी फतहसागर में छोड़ा जाएगा। एेसे में संभव है कि शनिवार सुबह तक फतहसागर में भी पानी समाने लगे।
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आकोदड़ा में आया सात फीट पानी
देवास द्वितीय योजना के तहत बनाए गए आकोदड़ा बांध में 7 फीट पानी की आवक हुई। इस मानसून में यह बांध पहली बाद बीलोसील से ऊपर आया है। इस बांध की पूर्ण भराव क्षमता 60 फीट की है। इसका पानी टनल के माध्यम से पिछोला झील में आता है। इसी प्रकार मानसी वाकल के गौराणा बांध में 5 फीट पानी की आवक हुई। इससे बांध का जलस्तर बढ़कर 570.50 मीटर हो गया। इधर मदार छोटा और बड़ा तालाब का जलस्तर 16 फीट के पार हो गया। इसी प्रकार बड़ी तालाब में तीन फीट पानी की आवक हुई। इसका जलस्तर 10.50 फीट हो गया।
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9 इंच खोले अलसीगढ़ के गेट
बारिश ( Mansoon ) होने के बाद देवास प्रथम के अलसीगढ़ में अच्छा पानी आने से इसके गेट पूर्व में 6 इंच खोले गए थे। इधर शुक्रवार दोपहर में बांध का गेज करीब पांच फीट बढ़ गया। एेसे में इसके गेट 3 इंच बढ़ा दिया और 9 इंच तक खोल दिए गए। इससे नांदेश्वर चैनल से होते हुए पानी पिछोला तक पहुंच रहा है।
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गिरा शहर कोट का हिस्सा
सिटी स्टेशन रोड के सामने शहर कोट का कुछ हिस्सा जर्जर होने के कारण ढह गया। आसपास के लोगों ने बताया कि करीब 10-12 वर्ष पूर्व भी इसी तरह यहां से कुछ हिस्सा गिरा था। इससे दो-तीन वाहन मलबे के नीचे दब गए। बाद में प्रशासन ने ईंटों और सीमेंट से इसकी मरम्मत करवाई, लेकिन फिर उसी स्थान से क्षतिग्रस्त हो गया। यहां शहर कोट का कुछ हिस्सा अभी भी लटक रहा है। इससे कभी भी बड़ा हादसा होने की संभावना है।
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जर्जर मकान का हिस्सा गिरा
शहर के कलश मार्ग क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर एक जर्जर मकान ढह गया। घटना के समय आसपास कोई मौजूद नहीं था। एेसे में बड़ा हादसा नहीं हुआ। मकान गिरने के बाद नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने की कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई देर शाम तक जारी रही। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि मानसून से पूर्व नगर निगम ने जर्जर मकान मालिकों को नोटिस देकर इतिश्री कर ली। इससे इस प्रकार के हादसे हो रहे हैं।
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नाले से निकासी बंद सड़कों पर भरा पानी
लंबे समय से गोविंदपुरा (एमबी) कॉलेज ग्राउंड के सामने रहने वाले लोग काफी परेशान हो रहे हैं। यहां पानी निकासी के लिए बने नाले में सीवरेज लाइन डालने से बारिश का पानी भर रहा है। सीवरेज टास्क फोर्स के पूर्व सदस्य महेश शर्मा ने बताया कि ड्रेन वॉटर को सीवरेज लाइन में डालने से व आकार छोटा होने से जल भराव की समस्या हो रही है। उन्होंने मांग की कि पुराने नाले को पुन: खोल कर स्थानीय लोगों को राहत प्रदान की जाए। कल के जल भराव से एक बेसमेंट में पानी भर गया व जेनरेटर, इलेक्ट्रिकल पैनल सब जल गए। लाखों रुपए का नुकसान हुआ।
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एवीवीएनएल के स्टोर में घुसा पानी
देबारी स्थित एवीवीएनएल के स्टोर की दीवार शुक्रवार सुबह भरभराकर गिर गई। यहां गत दिनों हुए हाईवे के निर्माण के दौरान इंजीनियरों ने दीवार से सटाकर हाइसे का भराव डाल दिया। उन्होंने रिटर्निंग वाल नहीं बनाने से दीवार भरभराकर नीचे गिर गई।
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शहर में कई जगह बैठी सड़क
गत दिनों हुए सीवरेज के कार्य के बाद भराव डालकर सड़कें तो बना दी गई। लेकिन पूरी तरह से भराव को नहीं दबाए जाने से बारिश के दौरान बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए। इससे दुपहिया वाहन चालक हादसों का शिकार भी हुए। हाथीपोल मार्ग, सूरजपोल, भूपालपुरा मठ के पास सहित कई जगह बारिश से गड्ढे़ हो गए।





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