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alwar letest political news हाथ मलती रह गई बसपा और सत्ता की मलाई चट कर गए नेता


अलवर. alwar letest political news पहले चुनाव हारने वाले नेताओं ने बसपा छोड़ी और अब चुनाव जीतने वाले पार्टी छोड़ गए, बसपा के रणनीतिकार ताकते ही रह गए। बसपा ने गत विधानसभा चुनाव में अलवर जिले में16 फीसदी से ज्यादा वोट लिए, लेकिन चुनाव के बाद जिले में बसपा फिर खाली हाथ रह गई।

गत विधानसभा चुनाव में बसपा ने अलवर जिले में करीब 16 प्रतिशत वोट प्राप्त कर एवं दो विधायक निर्वाचित करा सभी को चौंका दिया। लंबे समय बाद बसपा का जिले में चुनावी प्रदर्शन बेहतर रहा और दो विधायक निर्वाचित करा एवं कुछ विधानसभा क्षेत्रों में बसपा प्रत्याशियों ने 50 हजार से ज्यादा वोट हासिल कर खुद को जिले के प्रमुख राजनीतिक दलों में शामिल करा लिया। पार्टी की यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिक पाई और लोकसभा चुनाव से पहले एक-एक कर पहले विधानसभा चुनाव हार चुके नेताओं ने बसपा का साथ छोड़ दिया, वहीं गत सोमवार को जिले से बसपा टिकट पर जीते दोनों विधायक संदीप यादव व दीपचंद खैरिया ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया।
alwar letest political news जिले में तीसरा बड़ा दल बनकर उभरी बसपा

विधानसभा चुनाव में बसपा ने जिले के 11 विधानसभा क्षेत्रों में 15.87 फीसदी वोट लिए, बल्कि अपने दो विधायक चुनवाने के साथ ही कांग्रेस व भाजपा के वर्चस्व की राह भी रोक दी। बसपा ने जिले में विधायक बनवाने में भाजपा की बराबरी की, बल्कि कांग्रेस की उड़ान भी रोक दी। विधानसभा चुनाव में इस बार जिले में 18 लाख 35 हजार 89 मतदाताओं ने मत का उपयोग किया। इनमें 15.87 प्रतिशत यानि 2 लाख 91 हजार 176 वोट अकेले बसपा के खाते में गए।
alwar letest political news पहले 99 कार्यकर्ता छोड़ गए साथ

लोकसभा चुनाव से ऐन पहले बसपा से चुनाव लड़ चुकी रिंकी वर्मा व कई बड़े नेताओं सहित 99 कार्यकर्ताओं ने पार्टी का साथ छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया। उस दौरान अलवर ग्रामीण से बसपा प्रत्याशी रही रिंकी वर्मा, अलवर लोकसभा प्रभारी लियाकत अली, तत्कालीन जिलाध्यक्ष अमरसिंह बयाड़ी, ललित यादव, जाकिर हुसैन सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने बसपा को छोड़ दिया। अब सोमवार की रात को अलवर जिले से बसपा विधायक संदीप यादव व दीपचंद खैरिया ने भी बसपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया। इससे पूर्व रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी रहे लक्ष्मणसिंह की मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने भी बसपा छोड़ दी।
बसपा प्रत्याशियों ने लिए 50 हजार से ज्यादा वोट

खैरिया को मिले 73 हजार से ज्यादा

किशनगढ़बास विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी दीपचंद खैरिया को 73799 वोट मिले, जबकि यहां भाजपा के रामहेत यादव 63883 वोट ही ले पाए। कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व सांसद डॉ. करणसिंह यादव को 39033 वोट ही मिले। यहां बसपा ने भाजपा को 9916 मतों से हराया।

संदीप ने लिए 59 हजार से ज्यादा वोट

तिजारा विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी रहे संदीप यादव 59468 वोट लेकर कांग्रेस के दिग्गज एमादुद्ीन अहमद खान उर्फ दुर्रू मिया को 4457 वोटों से हरा दिया। यहां कांग्रेस के दुर्रुमियां को 55011 वोट ही मिल पाए।

ललित ने उठाए 55 हजार से ज्यादा वोट
मुण्डावर विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी ललित यादव को 55589 वोट वोट मिले। यहां भाजपा के मंजीत यादव को 73191 तथा लोकतांत्रिक जनता दल के भारत यादव को 21852 वोट मिले।

बन्नाराम ने लिए 28 हजार से ज्यादा वोट

राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी बन्नाराम मीणा ने 28199 वोट लिए। यहां कांग्रेस के जौहरीलाल मीणा ने 82876 व भाजपा विजय समर्थलाल मीणा ने 52578 वोट लिए।

रिंकी वर्मा को मिले 25 हजार से ज्यादा मत
अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी रिंकी वर्मा को 25379 वोट मिले। यहां कांग्रेस के टीकाराम जूली को 85752 तथा भाजपा के मास्टर रामकिशन को 59275 वोट मिले।

जगतसिंह को मिले 24 हजार से ज्यादा वोट

रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बसपा प्रत्याशी जगतसिंह को 24856 वोट मिले। यहां कांग्रेस की सफिया जुबेर को 83311 वोट मिले तथा भाजपा के सुखवंत सिंह को 71083 वोट मिले।
जसराम को मिले 12 हजार से ज्यादा वोट

बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी जसराम को 12433 वोट मिले। यहां निर्दलीय बलजीत यादव को 55160 तथा कांग्रेस के रामचंद्र यादव को 51324 वोट मिले। भाजपा के मोहित यादव को 37755 वोट मिले।

तारासिंह ने लिए 6 हजार से वोट
अलवर शहर विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी तारासिंह ने 6370 वोट लिए। यहां भाजपा के संजय शर्मा को 85041 तथा कांग्रेस की श्वेता सैनी को 63033 वोट मिले।

यहां नहीं दिखी मजबूत उपस्थिति

गत विधानसभा चुनाव में बसपा कठूमर, थानागाजी व बानसूर में मजबूत पकड़ साबित नहीं कर पाई। कठूमर में बसपा प्रत्याशी ईश्वर सिंह को 2332 वोट ही मिल सके, वहीं थानागाजी में बसपा प्रत्याशी कैलाश को 1309 वोट ही मिले। बानसूर में बसपा प्रत्याशी ओमप्रकाश को 1442 वोट ही मिले।

बसपा वैचारिक पार्टी, विधायकों के जाने से फर्क नहीं
बसपा जिलाध्यक्ष एडवोकेट अशोक वर्मा ने जिले में पार्टी के दो विधायकों के बसपा छोड़ कांग्रेस में जाने को पार्टी के साथ विश्वासघात बताया। उन्होंने कहा कि बसपा वैचारिक पार्टी है, इसलिए किसी नेता के जाने से पार्टी पर ज्यादा फर्क

नहीं पड़ता।
सवाल- विधायकों के जाने से पार्टी पर कितना असर पड़ेगा?

जवाब- बसपा विचारधारा आधारित पार्टी है। पार्टी की विचारधारा मजबूत है। यहां चुनाव में नए लोग जुड़ते हैं और कई बाद में पार्टी छोड़ भी जाते हैं, लेकिन पार्टी की विचारधारा पर कोई फर्क नहीं पड़ता। हां यह बात जरूर है कि ऐसी घटनाओं से पार्टी कार्यकर्ताओं में थोड़ी मायूसी आती है।
सवाल- बसपा से चुनाव लडऩे के बाद पार्टी में लोग ज्यादा क्यों नहीं रुकते?

जवाब- बसपा को कई लोग प्रशिक्षण केन्द्र मानते हैं। चुनाव के दौरान कुछ लोग पार्टी का उपयोग करते हैं और बाद में छोड़ भी जाते हैं। बसपा डंडा वाली नहीं वैचारिक पार्टी है, इसलिए लोग मौका पाकर चले जाते हैं।
सवाल- नेताओं के बसपा छोडऩे का कारण कहीं पैसा लेकर टिकट देना तो नहीं?

जवाब- बसपा में पैसे लेकर टिकट देने की बात गलत है। बसपा अच्छे लोगों को चुनाव में टिकट देती है। लेकिन बाद में कुछ लोग अपना जमीर बेच देते हैं और निजी स्वार्थ के चलते दूसरे दलों में चले जाते हैं।
सवाल- बार-बार नेताओं के बसपा छोडऩे से पार्टी पर क्या असर होगा?

जवाब- कुछ लोगों के पार्टी छोडऩे से पार्टी का वोट बैंक प्रभावित नहीं होगा। कार्यकर्ता और जोश से कार्य करेंगे। यूपी में भी कई बार लोग पार्टी छोड़ गए, लेकिन वहां बसपा ने बहुमत से सरकार बनाई।



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