महेश व्यास
बाबरा . ‘कौन कहना है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों...’। हौसलों को बयां करती इन पंक्तियों को देवली कलां गांव की वॉलीबाल खिलाड़ी सोनिया साकार कर रही है, जो कि एक हाथ होने के बावजूद वॉलीबाल को एेसे नचाती है मानों कोई कठपुतली हो। हौसलों पर सवार सोनिया का खेल मैदान में जज्बा देख वहां मौजूद हर कोई आश्चर्यचकित है।
दरअसल, बाबरा कस्बे के राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय में ६४ वीं जिला स्तरीय वॉलीबाल (१९ वर्षीय छात्रा वर्ग) प्रतियोगिता चल रही है। इसमें राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय देवली कलां की छात्रा सोनिया पुत्री भंवरलाल सीरवी भी भाग लेने पहुंची है। खास बात ये है कि इस छात्रा के एक ही हाथ है। बावजूद इसके उसने अपनी लगन व मेहनत से इस खेल को भी बौना साबित कर दिया। सोनिया के साथ पहुंची खेल प्रशिक्षिका अमन चौधरी ने बताया कि सोनिया का जन्म से एक हाथ नहीं है, फिर भी वह इस खेल को बखूबी के साथ खेलती है। इस जज्बे का ही असर है कि उसे इस टीम में शामिल किया है। आपको बताते चले कि बाबरा में चल रही जिलास्तरीय प्रतियोगिता में राबामावि देवली कलां की टीम मंगलवार को फाइनल मुकाबले में द्वितीय स्थान पर रही है। इससे पूर्व छात्रा सोनिया पिछले वर्ष रायपुर में हुई वॉलीबाल प्रतियोगिता में भी अपना जलवा दिखा चुकी है।
सीख : बाध्यता नहीं आने दी आड़े
खिलाड़ी छात्रा सोनिया सीरवी ने कहा कि उसने कभी एक हाथ के नहीं होने को आड़े नहीं आने दिया। वह खेल ही नहीं, अपने सारे काम आराम से करती है। उसका कहना है कि उसका पसंदीदा खेल ही वॉलीबाल ही है। इसके लिए वह रोजाना नेट पर जमकर प्रेक्टिस भी करती है।
जमकर प्रहार, सर्विस भी जबरदस्त
सोनिया सीरवी के जन्मजात से ही बायां हाथ कोहनी से आगे नीचे तक नहीं है। इस बाध्यता को दरकिनार करते हुए सोनिया मैच में प्रतिद्वंद्वी टीम के खिलाडिय़ों की सर्विस पर पूरा बैलेंस व तालमेल बिठाते हुए हवा में उछलकर प्रहार करती है तो वॉलीबाल सीधे नेट के उस पार जाती है। खास बात ये है कि टीम में सोनिया सर्विस भी बखूबी से करती है।





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