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खून-पसीने की कमाई के साथ अब सांसें भी दांव पर

मनीष कुमार सिंह

अजमेर. जिन्दगीभर अति विशिष्टजन की सेवा में रहकर अपने खून-पसीने की कमाई को परिवार के अच्छे दिन के लिए दांव पर लगाने वाले नब्बे वर्षीय हीरालाल की सांसें भी अब जवाब देने लगी है। जिंदगी भर की जमापूंजी गंवाने का सदमा ऐसा लगा कि पहले आंखों ने साथ छोड़ा तो अब बोलने-सुनने की क्षमता भी जा चुकी है।
सुभाषनगर खानपुरा रोड निवासी हीरालाल अजमेर के सर्किट हाउस की राजकीय सेवा से करीब 30 साल पहले सेवानिवृत्त हुए। वीवीआईपी की सेवा में रहने के दौरान अपनी मेहनत की पाई-पाई बच्चों व अपने बुढ़ापे के लिए जोड़ी। आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी का एजेंट घर आया तो जमापूंजी पर अच्छे रिटर्न का सब्जबाग दिखाया। आसपास के लोगों को निवेश करता देख उसने भी पत्नी इन्द्रावती, पुत्र रामादीन व पुत्रवधू के नाम से 18 लाख का निवेश कर दिया। तीन-चार माह सब कुछ ठीक चला लेकिन इसके बाद ब्याज आना बंद हुआ। फिर मूल रकम डूबने की कगार पर पहुंच गई। सोसायटी दफ्तर के चक्कर लगाने वाले हीरालाल की पहले आंखों की रोशनी गई फिर शरीर कमजोर हुआ तो चारपाई पकड़ ली। अब सिर्फ जिंदा होने का आभास बचा है। पत्नी इन्द्रावती और पुत्रवधू दिनरात सेवा में रहते हैं। बेटा रामादीन छोटी से दुकान चलाकर परिवार का गुजर-बसर की कोशिश करता है।

40 मुकदमे दर्ज, जगी उम्मीद

अजमेर में अब तक कोतवाली थाने में आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के खिलाफ 40 मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। निवेशकों में सबसे ज्यादा एचएमटी, रेलवे से सेवानिवृत्त व वीआरएस लेने वाले हैं। संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शर्मा का कहना है कि सबने अच्छे भविष्य के लिए जमापूंजी का निवेश किया था लेकिन कुछ माह बाद ही सबकुछ बिखर गया। अब न्यायालय से ही न्याय की उम्मीद है।

करीब 4 करोड़

संघर्ष समिति के अध्यक्ष शर्मा ने बताया कि एडवोकेट अरविन्द मीणा के जरिए 40 पीडि़तों ने मुकदमा दर्ज करवाया है। इसमें से अधिकांश ने 5 से 25 रुपए लाख रुपए तक का निवेश किया, जो करीब साढ़े 3 से 4 करोड़ रुपए तक हैं। अब भी शहर में सैकड़ों लोग हैं जिन्हें सोसायटी में निवेश किया था।



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