बीकानेर. देश के अलग-अलग राज्यों से बीकानेर आए कृषि विशेषज्ञों ने माना कि यहां की मिट्टी कम पानी में अच्छी पैदावार देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि बीकानेर के किसान जिन संसाधनों से खेती कर तकनीक का सदुपयोग कर रहे हैं, वो प्रेरणादायी है। झारखंड से आए कृषि परियोजना निदेशक प्रवीण कुमार ने राजस्थान पत्रिका से बातचीत में बताया कि झारखंड व अन्य क्षेत्रों में हर साल एक से डेढ़ हजार मिमी तक बारिश होती है। इससे चावल की फसल को अच्छा फायदा होता है।
इसके बावजूद पानी बचाने की दरकार है। नदी-नाले अधिक होने से पानी बहकर दूसरे राज्यों में जाता रहता है। उन्होंने बताया कि बीकानेर के किसानों के पास कम पानी में अच्छी पैदावार लेने की उम्दा तकनीक है। इसको वे अपने क्षेत्र में भी आजमाएंगे। प्रदीप कुमार ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि इस रेतीले इलाके में औसत बारिश होती है, तापमान अधिक रहता है, एेसी विपरित परिस्थियों में यहां का काश्तार खेत में फसल से पैदावार लेता है, यह सराहनीय है।
विपरीत मौसम में सफल
मिजोरम से आई सहायक कृषि निदेशक जामी ने बताया कि बीकानेर का मौसम मिजोरम से विपरीत है। यहां बारिश का अभाव है, तापमान अधिक रहता है। जामी ने कहा कि उन्हें बीकानेर में खेती की तकनीक से रूबरू होने का अवसर मिला है, जो अद्भुत है। उन्होंने कहा कि यहां किसान किस तरह से कम पानी में अधिक पैदावार देने वाली फसलों की खेती कर रहे हैं, उससे जीवन यापन कर रहे हैं। यह काफी चुनौतीभरा है, इनसे प्रेरणा लेकर इसे वहां अजमाने का प्रयास करेंगे।
जाना मूंगफली फसल प्रबंधन
छह राज्यों से आए प्रसार कार्यकर्ताओं ने मूंगफली फसल में अग्रिम प्रबंधन क्रियाएं विषयक प्रशिक्षण के दौरान सोमवार को बीछवाल स्थित कृषि अनुसंधान केन्द्र का भ्रमण किया।





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