उदयपुर/ गोगुंदा. bangali doctor उपचार के नाम पर दवाइयों के साथ स्टेरॉइड का उपयोग कर रहे झोलाछाप चिकित्सक की खामियों से हुई महिला की मौत के बाद स्थानीय प्रशासन ने आखिरकार चुस्ती दिखाई है। क्षेत्र के उपखण्ड अधिकारी ने मामले में गंभीरता दिखाते हुए लोगों की जान के दुश्मन बने बैठे झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अब एक बार फिर से स्थानीय चिकित्सा विभाग में मामले को लेकर कुछ हलचल बनी है।
गौरतलब है कि बुधवार को मन्नाजी का गुढ़ा निवासी रोगी भूरी बाई का जसवंतगढ़ स्थित झोलाछाप ने उपचार किया था। इसके बाद उसकी तबीयत और खराब हो गई। अंतत: उसे उदयपुर स्थित चिकित्सालय ले जाया गया, जहां दौराने उपचार उसने दम तोड़ दिया। बता दें कि गोगुंदा कस्बे के बस स्टैण्ड पर करीब ५ से अधिक झोलाछाप क्लीनिक की आड़ में उनका धंधा चला रहे हैं। बिना बीमारी जांचें वह मरीजों को हैवी डोज की दवाइयां दे रहे हैं तो अनुपात से ज्यादा इंजेक्शन भी लगा रहे हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य को लेकर पूरा चिकित्सा महकमा अवगत है। इसके बाद भी झोलाछापों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो रही है।
टीम का गठन
उपखण्ड अधिकारी से मिले आदेश की पालना में चिकित्सक दलों का गठन किया गया है। सर्वे कर झोलाछापों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. ओपी रायपुरिया, बीसीएमओ, गोगुंदा
ये कैसी कार्रवाई
हकीकत यह है कि उदयपुर जिले में दुकानें चला रहे झोलाछापों के बारे में हर ब्लॉक के मुख्य चिकित्सा अधिकारी अवगत हैं। ब्लॉक स्तर पर ही क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप चिकित्सकों का सर्वे कराने की बजाए प्रशासनिक आदेश पर चिकित्सा महकमा सीधे मौके पर धमकता तो असरकारक कार्रवाई होती। ऐसा नहीं कर विभाग ने ऐसे झोलाछापों को एक बार जमींदोज होने का मौका दिया है। अब होगा क्या कि ऐसे क्लीनिक संचालक कुछ समय के लिए अंडर ग्राउंड हो जाएंगे। गहमागहमी में चिकित्सा दल कुछ छुटभइयों को उठा लेगा। मामला ठंडा पडऩे पर झोलाछाप फिर लौट आएंगे। इसलिए दिखावा करने और ढिंढोरा पीटने की बजाय आवश्यकता कार्रवाई करने की है। bangali doctor ताकि लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों को उचित आईना दिखाया जा सके।





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