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बेशकीमती धरोहर की सुरक्षा ताक पर

भुवनेश पण्ड्या

उदयपुर. मेवाड़ की पूरी आभा मानो इसमें समाहित है, एक से एक अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर जिन्हें देखते ही आंखे ठहर जाए। बेशकीमती प्रतिमाएं तो पुरातनकालीन संस्कृति का बेजोड़ नमूना है। इस पुरा सम्पदा की यहां कोई सुरक्षा नहीं है। ना कोई सुरक्षाकर्मी, ना स्टाफकर्मी तय पोशाक में। कौन यहां कार्मिक है और कौन बाहरी इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। पत्रिका टीम मंगलवार को यहां की सुरक्षा व्यवस्था जांचने पहुंची। टीम बेरोकटोक अन्दर गई तो हर कक्ष में घूमती रही। किसी ने भी टीम को रोकने की जहमत नहीं उठाई। यहां बात आहड़ संग्रहालय की है। आयड़ क्षेत्र के महासतियां के समीप स्थित इस संग्रहालय में अन्दर अनमोल धरोहर पड़ी हैं, लेकिन यहां की सुरक्षा पूरी तरह से ताक पर है।

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ये है खास

कहा टिकट ले आओ

मुख्य प्रवेश द्वार पर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं था। टीम दुपहिया वाहन परिसर में खड़ा कर सीधे ही संग्रहालय के अन्दर प्रवेश कर गई। बगैर तय गणवेश में बैठकर बाते कर रहे दो कार्मिक संग्रहालय के अन्दर मौजूद थे, उनके पास सुरक्षा के लिए कुछ नहीं था। इनमें से एक ने कहा कि टिकट ले ली क्या...फिर हमने परिचय दिया और संग्रहालय देखने लगे। ना जांच ना

किसी ने परिचय पत्र तक की मांग की। हालात देख लगा कि यहां कोई सुरक्षा नहीं है, सवाल ये है कि हमारी धरोहर कितनी सुरक्षित है।

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- उदयपुर के सबसे लोकप्रिय पर्यटक आकर्षणों में से एक यह पुरातत्व संग्रहालय राज्य की सरकार द्वारा प्राचीन वस्तुओं की खुदाई के दौरान मिली वस्तुओं के संरक्षण के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। संग्रहालय में 10 वीं शताब्दी से जुड़ी प्राचीन वस्तुओं का एक अच्छा संग्रह है। लोहे की वस्तुएं, मिट्टी के बर्तन और आदिम लोगों से संबंधित अन्य वस्तुएं इसमें शामिल हैं। हालांकि संग्रह विशाल नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से अद्वितीय है।

- राजस्थान के पुरातत्व विभाग की ओर से वर्षों से आहड़ संग्रहालय में 1700 ई.पू.भगवान बुद्ध की एक प्रतिमा 10 वीं शताब्दी की है। इसमें विष्णुनागनाथन की मूर्ति के साथ मूर्तियों का संग्रह सबसे आश्चर्यजनक है।

- धरकोट के उत्खनन स्थल से आहड़ संग्रहालय में बड़ी संख्या में वस्तुएं यहां लाई गई हैं। इस संग्रह में 1 शताब्दी ईसा पूर्व से संबंधित मुहरें, पत्थर, पशु आंकड़े, अनाज के बर्तन, गेंद शामिल हैं। मिट्टी के बर्तनों के अवशेष, एक विशाल मिट्टी का बर्तन और टेराकोटा खिलौने पड़े हैं।

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ऊंटों पर लादकर चलाई जाने वाली बंदूकें

यहां ऊंटों पर लादकर चलाई जाने वाली दुर्लभ बंदूकें, कारतूस बंदूक सहित कई ऐसे हथियार हैं, जो आज के दौर में विशेष महत्व रखते हैं। यहां अलग-अलग काल के जिरह अख् तर, तलवारे, भाले व युद्ध के दौरान पहने जाने वाले लोहे के ताज हैं।



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