देसूरी. देसूरी चारभुजा नाल के खतरनाक मोड़ और खराब रास्ता अब तक सैकड़ों की जान ले चुका है। हर दुर्घटना पर जिम्मेदार आकर अफसोस जताते हैं, इस मार्ग को सुधारने का आश्वासन मिलता है, योजनाएं तैयार की जाती है फिर योजना कागजों में बंद होकर रह जाती है। यहां अब तक करीब 120 लोगों की मौत विभिन्न हादसों में हो चुकी है। कई अब भी इस मार्ग पर हुए हादसे के दर्द से कराह रहे हैं लेकिन जिम्मेदारों का ध्यान अब तक इस मार्ग को दुरुस्त करवाने की ओर नहीं गया है। अब जनता आन्दोलनरत है।
उल्लेखनीय है कि उदयुपर से बीकानेर और जैसमेलर तक सडक़ मार्ग मेवाड़ रियासत के समय बनाया गया था। यह मार्ग सेना के जवानों के लिए उस समय सुरिक्षत माना जाता था। सेना की सुगमता के लिए बनी इस सडक़ के कटाव को कम करने के लिए कई बार निर्णय लिए, लेकिन कोई कार्य नहीं हुआ। चारभुजा देसूरी मार्ग पर कई जगहों पर खतरनाक घुमावदार मोड़ हैं।
स्वीकृति मिली पर काम नहीं हुआ
2010 में पाली से गौमती चौराहे तक मेघा हाइवे निर्माण की स्वीकृति जारी हुई थी। मगर देसूरी के हरिओम आश्रम के आधा किलोमीटर तक ही निर्माण हो पाया। जबकि हरिओम आश्रम से अभयारण्य का क्षेत्र शुरू हो जाता है। देसूरी चारभुजा नाल मार्ग अभयारण्य के बीच से गुजरता है। ऐसे में वन विभाग से अभयारण्य क्षेत्र में मेघा हाइवे की स्वीकृति नहीं मिली। राजस्थान राज्य सडक़ निर्माण लिमिटेड ने करीब दस किलोमीटर का सडक़ का निर्माण नहीं किया। 2014 में वन विभाग ने देसूरी चारभुजा नाल में सडक़ निर्माण को लेकर पर राष्ट्रीय वन्यजीव मंडल की ओर से एनओसी जारी कर दी थी। मात्र आरएसआरडीसी को सुप्रीम कोर्ट में एप्लीकेशन लगाकर स्वीकृति लेना शेष था। मगर उसके बाद न जाने कहां वो फाइल अटक गई। जिसके कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। तत्कालीन राजसमंद जिला कलक्टर कैलाशचंद वर्मा ने इस सडक़ के निर्माण को लेकर कई प्रयास किए। आठ किलोमीटर सडक़ निर्माण को लेकर वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा की थी।
बारह साल में 120 गई जानें, 250 घायल
मानवतों का गुडा से नाल की शुरूआत के एक किलोमीटर की दूरी पर पंजाब मोड है। यह मोड चन्द्र आकार लिए हुए है। चारभुजा से देसूरी जाते वक्त नाल में कई घुमावदार मोड़ पर वाहनों का संतुलन बिगडऩे पर वाहन चट्टानों से टकरा कर पलट जाते हैं। सुरक्षा दीवार जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। जिसकी मरम्मत लम्बे समय से नहीं हुई है। पिछले शुक्रवार को देसूरी चारभुजा नाल में दर्दनाक हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई। जबकि देसूरी नाल में 7 सितम्बर 2007 से 23 अगस्त 2019 में कई हादसे हो चुके हैं। जिसमें करीब 120 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 250 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। इसके बावजूद जिम्मेदारों की नींद नहीं खुली है।
समिति ने किया संघर्ष का निर्णय
ऐसे हादसों को रोकने के लिए अब गोडव़ाड और मेवाड़ क्षेत्र के लोगों ने देसूरी नाल नवनिर्माण संघर्ष समिति का गठन किया है। इस मार्ग के निर्माण को लेकर राजसमंद जिला कलक्टर को ज्ञापन भी सौंपा। सरकार ने इस मांग को गंभीरता से नही लिया तो गोड़वाड़ और मेवाड़ क्षेत्र के लोग आंदोलन का रूप देने के लिए तैयार हैं। संघर्ष समिति में शक्तिसिंह सोलंकी संरक्षक, भंवरसिंह चौहान अध्यक्ष, डॉ. गोविन्दसिंह सोलंकी संयोजक, महेन्द्रसिंह दाता निवासी व किशनलाल पंचोली उपाध्यक्ष, रमेशचन्द्र देवपुरा कोषाध्यक्ष, जगन्नाथ सोलंकी सचिव, किशनलाल भंडारी प्रचारमंत्री एवं सदस्य प्रवीण कुमार सोलंकी सरपंच देसूरी, गुलाबनबी पठान, फुआराम चौधरी सहित अन्य सदस्यों को शामिल किया गया।
सडक़ का निर्माण होना चाहिए
- देसूरी चारभुजा नाल में हादसों को देखते हुए सरकार को इसके निर्माण को लेकर कदम उठाए होते तो इन हादसों को रोका जा सकता था। सरकार की उदासीनता के चलते आज तक इस सडक़ का निर्माण नहीं करवाया गया है।
महेन्द्रसिंह एवं किशनलाल पंचोली, उपाध्यक्ष, संघर्ष समिति





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