अजमेर. राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में रोगियों के लिए मुफ्त दवा और जांच की व्यवस्था है। इसका लाभ रोगी उठा भी रहे हैं, लेकिन कहीं चिकित्सक की कमी है तो कहीं जांच विशेषज्ञ नहीं है। इसके चलते अस्पताल में रोगियों को परेशान होना पड़ रहा है।
अस्पताल के दवा काउंटरों पर भी रोगी निराश लौटने को मजबूर हैं। यही हाल अजमेर जिले के ब्यावर उपखंड मुख्यालय स्थित राजकीय अमृतकौर चिकित्सालय की भी है। यहां मुख्य रूप से सोनोग्राफी को लेकर रोगी सबसे अधिक परेशान है।
इसकी वजह एक ही रेडियोलॉजिस्ट का होना है। इसके चलते बुधवार को आए कुछ रोगियों को सोनोग्राफी के लिए 10 अक्टूबर की तारीख दी गई। गर्भवती महिलाएं सहित अन्य मरीज सोनोग्राफी के लिए अमृतकौर चिकित्सालय आ रहे हैं। सोनोग्राफी की तारीख मिलने पर सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज से आने वाले मरीजों को है। अभी वर्तमान में रोजाना 70 से 80 मरीज सोनोग्राफी के लिए आते हैं, लेकिन यहां पर अभी रोजाना 40 से 50 सोनोग्राफी ही हो पाती है। यही वजह है कि वर्तमान में बाद की तिथि दी जा रही है। गौरतलब है कि चार जिलों से सटे अमृतकौर चिकित्सालय में दूर दराज से भी मरीज आते है।
छह माह से एेसे हालात
अस्पताल में करीब छह माह से एेसे ही हालात चल रहे हैं। मार्च माह की शुरुआत में दो रेडियोलॉजिस्ट थे, लेकिन डॉ. राजकुमार सैन का स्थानान्तरण हो गया। इसके बाद कोई नियुक्ति नहीं हुई। दो रेडियोलॉजिस्ट थे तो ज्यादा से ज्यादा एक दिन के अन्तराल पर सोनोग्राफी हो जाती थी, लेकिन तबादले के बाद पटरी से उतरी व्यवस्थाएं सुधर नही पा रही है।
निजी संस्थान से जांच मजबूरी
अधिकतर मरीजों को सरकारी चिकित्सक सोनोग्राफी जांच लिख देते हैं। एेसे में जो जरूरी होते है उनकी तो उसी दिन या कुछ दिनों के अन्तराल में सोनोग्राफी हो जाती है। अधिकतर को एक माह बाद का समय दे दिया जाता है। एेसे में बाहर निजी से जांच कराना मजबूरी हो जाता है। नि:शुल्क सुविधा होने के बावजूद भी पैसे खर्च करने पड़ते है।
डॉ. साबिर हुसैन, रेडियोलॉजिस्ट ब्यावर के अनुसार मरीज की स्थिति देखकर सोनोग्राफी के लिए तारीख दी जाती है। सामान्य मरीजों को एक माह बाद की तारीख दी जा रही है। इमरजेंसी होने पर तुरन्त, एक या दो दिन, या फिर सात दिन का समय भी दिया जा रहा है। एक रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है। एेसे में परेशानी हो रही है।





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