दौसा. जिला अस्पताल में चिकित्सकों में आपसी विवाद उभर कर सामने आया है। अस्पताल की मातृ एवं शिशु इकाई की कई महिला चिकित्सकों ने सोमवार को जिला कलक्टर से मिलकर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी पर ड्यूटी लगाने में भेदभाव व अभद्रता का आरोप लगाया है। इससे अस्पताल में मरीजों के रखवाले चिकित्सकों के बीच चल रहा मनमुटाव चर्चामें आ गया है।
Dispute among doctors in Dausa district hospital
जिला चिकित्सालय की महिला चिकित्सकों ने कलक्टर को ज्ञापन देकर आरोप लगाया कि गायनी विभाग में 7 स्त्री रोग चिकित्सक हैं, लेकिन उनमें से पीएमओ 5 ही महिला चिकित्सकों की आपातकालीन ड्यूटी लगाते हैं। दो महिला चिकित्सकों की आपातकालीन तो दूर एमआईसी व पोस्टमार्टम में ड्यूटी भी नहीं लगाई जा रही। इससे शेष पांच चिकित्सकों का कार्यभार बढ़ रहा है। अधिक ड्यूटी लगने से वे स्वास्थ्य लाभ के लिए छुट्टी नहीं ले पाती हैं। घर का कामकाज भी नहीं देख पाती है। शारीरिक एवं मानसिक रूप से अस्वस्थ्य रहने लगी हैं।
महिला चिकित्सकों ने आरोप लगाया कि वे पीएमओ को गत तीन महीने से अवगत करा रही हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अभद्र व्यवहार कर कक्ष से बाहर जाने का आरोप भी लगाया है। साथ ही एक महिला चिकित्सक के चिकित्सक पति पर भी अभद्रता का आरोप लगाते हुए उनको विंग के प्रभारी पद से हटाने की भी मांग की है।
ज्ञापन में बताया कि सामान्य चिकित्सालय में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों की माह में 4 रात्रिकालीन व 2 सांयकालीन ड्यूटियां लगी हैं। वहीं एमसीएच व गायनी विभाग में कार्यरत महिला चिकित्सा अधिकारियों की 7 रात्रिकालीन व 6 सांयकालीन आपात ड्यूटियां व 9 एमआईसी ड्यूटी लग रही है। रात्रिकालीन ड्यूटी में मात्र 1 चिकित्सक मौजूद होता है, जबकि दो लगाने चाहिए।
महिला चिकित्सकों ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि यदि पूर्व की भांति समान ड्यूटी नहीं लगाई जाती है तो वे सामूहिक रूप से अवकाश ले सकती हैं। ऐसे में अव्यवस्थाओं की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। जिला कलक्टर को शिकायत सौंपने वाली महिला चिकित्सकों में डॉ. सारिका गोठवाल, डॉ. रेखा झारवाल व डॉ. कल्पना शर्मा आदि थी।
कई चिकित्सक रात्रिकालीन ड्यूटी करने से कतराते हैं। वे किसी को व्यक्तिगत रूप से परेशान या अभद्रता नहीं करते हैं। ड्यूटी लगाने में कोई भेदभाव नहीं करते हंै।
डॉ. सीएल मीना, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी जिला अस्पताल दौसा
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