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video- मजुमदार ने बांसुरी पर छेड़ी मल्हार की तान, मंत्रमुग्द हुए श्रोता

बीकानेर. बांसुरी तान व तबले की ताल के साथ जब राग मियां की मल्हार के स्वर छेड़े तो बुधवार को पिंक मॉडल स्कूल परिसर में बैठे विद्यार्थी मानो शास्त्रीय संगीत की सरिता में हिलौरे लेने लगे। स्पिक मैके के बीकानेर अध्याय के तत्वावधान में हुए अन्तरराष्ट्रीय बांसुरी वादक रोनू मजुमदार (Ronu Majumdar) ने बांसुरी पर राग मियां की मल्हार में आलाप, जोड़, तान छेाड़ी तो स्कूल परिसर तालियों से गूंज उठा। मजुमदार ने विद्यार्थियों को शास्त्रीय संगीत की बारिकियां से रूबरू कराया। इस दौरान उन्होंने मियां मल्हार में 'कारे बदरिया घिर आये...व राग सुरदासी मल्हार में 'घिर आए बेरी बदरवा...की बंदिश गाकर सुनाई।

दूसरे चरण में मजुमदार ने मांड राग में 'कोसरिया बालम पधारो म्हारे देस...वादन के साथ ही गाकर भी सुनाया। कलाकार के साथ अजित पाठक ने तबला पर एवं मजुमदार के शिष्य कल्पेश ने बांसुरी पर संगत की। स्वर-ताल के संगम की दमदार प्रस्तुति से श्रोता भाव-विभोर हो गए। कार्यक्रम में शिशिर शर्मा, विष्णु प्रसाद व्यास ने कलाकारों को शॉल ओढ़ाकर स्मृति चिन्ह प्रदान किए। स्पिक मैके के राज्य सचिव दामोदर तंवर ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी।

यह रहे मौजूद
कार्यक्रम के आरंभ में विद्यार्थियों ने कलाकारों का तिलक लगाकार स्वागत किया। इस दौरान राजस्थान पुलिस भ्रष्ट्राचार निरोधक के अतिरिक्त अधीक्षक रजनीश पूनिया, उपअधीक्षक शिवरतन गोदारा, स्कूल प्राचार्य राजीव व्यास, जयश्री शर्मा मौजूद रहे।

विदेशों में भी ख्याति

रोनू मजुमदार ने भारतीय साज बांसुरी को आज के आधुनिक युग में विश्व पटल पर लोकप्रिय बनाने में अहम योगदान दिया है। कलाकार आज देश के साथ विदेशों में भी अपनी कला के लिए पहचान रखते है। बनारस में जन्मे मजुमदार ने बचपन में ही बांसुरी को थाम लिया था। आज भी गुरु शिष्य परम्परा का निर्वाह कर रहे हैं। आप तबला वादक पंडित किशन महाराज, ठुमरी गायिका गिरिजादेवी व शहनाई के उस्ताद बिस्मिल्ला खान सरीखे शास्त्रीय संगीत के गुणीजनों के सान्निध्य में रहे और संगीत की बारिकियां सीखी।



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