उदयपुर/झाड़ोल. chc news आदिवासी बाहुल्य उपखण्ड के सबसे पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र्र को चिकित्सा विभाग की ओर से सोनोग्राफी की सौगात मिली है। 40 साल बाद धनतेरस पर गर्भवती महिलाओं के लिए चिकित्सा विभाग की ओर से की गई ये पहल क्षेत्रीय महिलाओं के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है। सोनोग्राफी सुविधा का फायदा महिलाओं के बड़े तबके को होगा। क्षेत्र की महिलाओं को गर्भ में पल रहे शिशुओं के भविष्य को लेकर अब उदयपुर तक चक्कर भी नहीं काटने होंगे। हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाले मामलों में भी महिलाओं को राहत मिलेगी। सीएचसी को मिली इस सुविधा का श्रेय क्षेत्र की उपखण्ड अधिकारी डॉ. टी शुभमंगला और चिकित्सा अधिकारी डॉ हरिओत चौधरी को जाता है। सामूहिक प्रयासों से दोनों ही जिम्मेदारों ने विभाग के अधिकारियों का ध्यान स्थानीय महिलाओं की ओर खींचा।
हर साल 2500 प्रसव
झाड़ोल सीएचसी के अलावा फलासिया सीएचसी, ओगणा सीएचसी सहित दर्जनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वर्ष में करीब 25 सौ प्रसव होते हैं। ऐसे में उपखण्ड मुख्यालय पर सोनोग्राफी की सुविधा की नियमित मांग उठ रही थी। कड़वा सच यह भी है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाली गर्भवती महिलाओं के पास सोनोग्राफी रिपोर्ट नहीं होती। ऐसे में चिकित्सकीय जांच भी प्रभावित रहती है। बता दें कि चिकित्सकी नियमों के तहत एक सामान्य गर्भवती की 9 माह के दौरान न्यूनतम 4 बार सोनोग्राफी होनी चाहिए।
धनतेरस पर होगा शुभारंभ
झाड़ोल सीएचसी पर सोनोग्राफी मशीन का शुभारंभ धनतेरस पर होगा। वहीं मंगलवार व शुक्रवार को स्त्रीरोग विशेषज्ञ के माध्यम से सोनोग्राफी की सुविधा मिलेगी। chc news डॉ हरिओम चौधरी ने बताया कि सप्ताह में दो दिन सोनोग्राफी मशीन की सुविधा से गर्भवतियों को हर संभव फायदा देने के प्रयास होंगे।





No comments:
Post a Comment