jasraj ojha भीलवाड़ा. सरकारी तंत्र की लापरवाही का नमूना देखना है तो मेजा फीडर को देख लीजिए। गत तीन सितंबर से मातृकुंडिया बांध का पानी मेजा बांध में आ रहा है, लेकिन ७० फीसदी पानी बीच में बर्बाद हो गया। अमृत की यह बर्बादी हुई है, जल संसाधन विभाग की नाकामी से। पानी की इस बर्बादी का कारण है क्षतिग्रस्त मेजा फीडर। चार साल से इसकी मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि मातृकुंडिया बांध से पानी छोडऩे से पहले अस्थाई उपाय तक नहीं किए गए।
राजस्थान पत्रिका टीम ने गुरलां के निकट पार्वतीपुरा से पीथास तक करीब २० किलोमीटर तक मेजा फीडर का जायजा लिया। इसमें सामने आया कि जगह-जगह पानी बह रहा है। इसमें अब तक १२०० एमसीएफटी से अधिक पानी छोड़ा जा चुका है, लेकिन मेजा बांध में ४०४ एमसीएफटी पानी ही पहुंचा। फीडर में पानी छोड़ा गया, तब मेजा बांध में आठ फीट पानी था। अब तक इसका गेज १४.७ फीट तक पहुंचा है। करीब ५८ किलोमीटर लंबी मेजा फीडर में जगह-जगह रिसाव हो रहा है। इसके साथ ही फीडर में १५० से ज्यादा स्थानों पर चूहों ने सुरंगें बना दी हैं। इनके कारण भी लाखों लीटर पानी का रिसाव हो रहा है। निगरानी नहीं होने से कई जगह किसान फीडर तोड़कर खेतों में सिंचाई के लिए पानी चुरा रहे हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि ३० से ३५ फीसदी पानी ही मेजा बांध तक पहुंच रहा है।
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फैक्ट फाइल
०३ सितंबर को छोड़ा मातृकुंडिया बांध से पानी
५८ किलोमीटर लंबी मेजा फीडर
१२०० एमसीएफटी पानी छोड़ा अब तक
३० फीसदी पानी पहुंचा मेजा बांध
१४.७ फीट पानी है मेजा बांध में
आगे क्या: अब खर्च होंगे २५ करोड़
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में मेजा फीडर की मरम्मत के लिए २५ करोड़ रुपए देने करवाने की घोषणा की थी। जल संसाधन विभाग के अधिकारी इसके लिए योजना बना रहे हैं। इससे किसानों को राहत की उम्मीद जगी है।
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सही बात है कि मेजा फीडर से पानी बर्बाद हो रहा है। इसकी मरम्मत समय पर नहीं हुई। अब सरकार ने २५ करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। आने वाले सालों में राहत मिल पाएगी।
सुभाष भट्ट, सहायक अभियंता, मेजा बांध
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मातृकुंडिया बांध से तीन सितंबर को पानी छोड़ा था। पानी बाहर बह रहा है, यह सही है। बजट नहीं होने से काम नहीं हुआ। पहले मातृकुंडिया बांध भरता नहीं था, इसलिए फीडर की मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ी। बजट मिलते ही इसकी मरम्मत करवाई जाएगी।
किशन बहरवानी, सहायक अभियंता, मातृकुंडिया बांध





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