अलवर. alwar lok adalat desion news स्थाई लोक अदालत अलवर ने राज्य के मुख्य शासन सचिव और शासन सचिव को शहर में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड योजना के तहत डाली गई पेयजल पाइप लाइनों की जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित कर छह माह में जांच रिपोर्ट देने को कहा है।
alwar lok adalat desion news प्रकरण के अनुसार सोनावा निवासी छगन सिंह और कालाकुआं निवासी नरेन्द्र शर्मा ने एडवोकेट कुलदीप सैनी के जरिये स्थाई लोक अदालत में जनहित याचिका लगाई। जिसमें आरोप लगाया कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की योजना के तहत शहर में पेयजल पाइप लाइन डालने के लिए केन्द्र सरकार ने 140 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। जिसमें ठेका कम्पनी की ओर से 120 करोड़ रुपए खर्च कर पेयजल पाइप लाइन डाली जा चुकी है, लेकिन ये पाइप लाइन निर्धारित मापदण्डों के अनुसार नहीं डाली गई है। साथ ही भ्रष्टाचार और घपला भी हुआ है। पीएचईडी के अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण ही नहीं किया। अलवर शहर की पूरी सडक़ खोद दी गई। उसको लेवल नहीं किया गया और न ही सडक़ों पर डामर डाला गया।
योजना के तहत 24 घंटे पानी देने की स्कीम है, लेकिन स्थिति यह है कि 90 प्रतिशत लोगों को पानी ही नहीं मिल रहा है और शहर में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। alwar lok adalat desion news स्थाई लोक अदालत अलवर के अध्यक्ष जीएल शर्मा, सदस्य बलजीत सिंह यादव व पंकज गोयल ने इस जनहित याचिका का मंगलवार को स्वीकार कर लिया। लोक अदालत ने याचिका पर राज्य सरकार के मुख्य शासन सचिव और शासन सचिव को आदेश दिए हैं कि वे 4 सदस्यीय कमेटी गठित करें, जिसमें तीन अधिशाषी अभियंता स्तर के अधिकारी हो, जिन्हें पूरा तकनीकी ज्ञान हो तथा एक अकाउंट ऑफिसर स्तर का अधिकारी हो, जो भुगतान के बिलों की समुचित जांच कर सके। स्थाई लोक अदालत ने यह भी कहा कि जांच कमेटी में चारों अधिकारी ऐसे होने चाहिए, जो इस प्रोजेक्ट से कभी जुड़े नहीं रहे हों तथा अलवर में कभी पदस्थापित भी नहीं रहे हों। चारों अधिकारी कम्पनी के कार्य की जांच करें और लेखा की स्थिति से भी उसकी जांच कराएं तथा अपनी जांच रिपोर्ट छह माह के भीतर मुख्य शासन सचिव व शासन सचिव को प्रस्तुत करें।
जांच में जो कार्य कम मिले या उसमें कोई कमी हो तो नियमानुसार उस राशि की गणना कर वह राशि 14.05 करोड़ रुपए की सिक्योरिटी में से कम कर दी जाए। साथ ही सिक्योरिटी राशि छह माह तक कम्पनी एनसीआर वाटर्स पाइप लाइन प्रोजेक्ट, आईएचपी कम्पनी को अदा नहीं करें। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने के आदेश भी दिए।





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