अलवर. alwar nikay election news नगर निकाय चुनाव में राज्य सरकार की ओर से बिन पार्षद चुने ही सभापति बनने की छूट देने से निर्वाचित होने वाले पार्षदों के सपने धुंधला सकते हैं। इस बार प्रथम चरण के निकाय चुनाव में तीन में से दो नगर परिषद में सभापति पद सामान्य खाते में जाने से राजनीतिक पार्टियों सहित कई गैर राजनीतिक लोग भी सभापति पद को लेकर रणनीति बनाने लगे हैं।
नगर निकायों में चेयरमैन सीट का आरक्षण तय होते ही जिले की राजनीति उबाल पर है। इस बार अलवर नगर परिषद समेत जिले की पांच नगर निकायों में चेयरमैन सीट सामान्य खाते में जाने से चुनावी मुकाबला रोचक होने के आसार हैं। निकायों में वार्ड आरक्षण व निकाय प्रमुख आरक्षण का काम पूरा हो चुका है। इस कारण पार्षद चुनाव के दावेदार इन दिनों पूरी तरह चुनावी मूड में आ चुके हैं। वहीं सभापति पद को लेकर भी दावेदार जोड़तोड़ की रणनीति बनाने लगे हैं।
alwar nikay election news नए फार्मूले से फिर सकता पार्षदों की उम्मीदों पर पानी
राज्य सरकार की ओर से इस बार निकाय चुनाव में चेयरमैन चुने जाने के लिए पार्षद का चुनाव जीतने की बाध्यता खत्म कर दी है। अध्यक्षीय प्रणाली की तर्ज पर अब बिन पार्षद चुने ही सभापति का चुनाव लडऩा संभव होगा। यही कारण है कि निकाय चुनाव में सभापति पद को लेकर घमासान अन्य चुनावों की तुलना में ज्यादा होने की आशंका है। प्रदेश में अध्यक्षीय प्रणाली से निकाय प्रमुख चुने जाने के कारण राजनीतिक दलों के अलावा गैर राजनीतिक क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में चेयरमैन पद की दावेदारी की उम्मीद है।
alwar nikay election news पार्षदों के अरमानों पर इसलिए भारी नया फार्मूला
निकाय चुनाव में सभापति पद के चुनाव के लिए घोषित नया फार्मूला पार्षदों के अरमानों पर भारी पड़ सकता है। अब सभापति का चुनाव लडऩे के लिए उम्मीदवार को प्रस्तावक के रूप में एक पार्षद के हस्ताक्षर कराना जरूरी है। उम्मीदवार के लिए एक पार्षद के हस्ताक्षर कराना ज्यादा मुश्किल कार्य नहीं है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों के कई बड़े नेताओं के साथ ही व्यापारिक व अन्य क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के बड़ी संख्या में सभापति चुनाव में उतरने की संभावना रहेगी। जिससे पार्षदों का सभापति चुनाव लडऩा आसान नहीं रह जाएगा।
अलवर व भिवाड़ी में होगा रोचक मुकाबला
इस बार सबसे रोचक मुकाबला अलवर व भिवाड़ी नगर परिषद सभापति के चुनाव में होने की उम्मीद है। इसका कारण है कि दोनों ही निकायों में चेयरमैन सीट सामान्य वर्ग से है। राजनीतिक दृष्टि से दोनों ही निकायों में महत्वपूर्ण हैं। यहां भाजपा व कांग्रेस की राजनीति जिले में सबसे मुखर है। इस कारण राजनीतिक पार्टियों के साथ ही गैर राजनीतिक क्षेत्र से भी दावेदार सभापति का चुनाव लडऩे का मानस बनाने लगे हैं।
फिलहाल चुनाव तीन निकायों में, बाकी में उत्साह ठंडा
जिले में सभी नगर निकाय प्रमुखों के लिए आरक्षण तय हो चुका है, लेकिन फिलहाल उत्साह अलवर, भिवाड़ी नगर परिषद सभापति व थानागाजी नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव को लेकर है। जिले के शेष नगर निकायों में चुनाव अगले साल होने से वहां भी चुनाव को लेकर अभी उत्साह ठंडा है। हालांकि ऐसे निकाय क्षेत्रों में अध्यक्ष पद को लेकर चुनावी चर्चा जरूर शुरू हो गई हैं।





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