आज के समय में हमारा मोबाइल फोन एक शक्तिशाली उपकरण है, जो न केवल दूर बैठे व्यक्ति से बातचीत कराता है बल्कि बैंकिंग, नॉलेज, मनोरंजन और न जाने कितने सारे कामों में हमारी मदद करता है। लेकिन मोबाइल फोन का जरूरत से ज्यादा प्रयोग इसकी लत की श्रेणी में गिना जाता है। भले ही आपको एक बार के लिए ऐसा न लगे लेकिन कई बार हम फोन का इतना इस्तेमाल करने लगते हैं कि यह हमारे लिए एक एडिक्शन बन जाता है। एक्सपर्ट ने फोन एडिक्शन को कई भागों में बांटा है। हालांकि एक्सपर्ट में इस बात को लेकर विवाद है कि सेलफोन की अधिकता को एडिक्शन कहा भी जाए या नहीं और क्या यह आवेग नियंत्रण का परिणाम है। विशेषज्ञों ने फोन से जुड़ी समस्याओं को कुछ इस प्रकार बताया है।
नोमोफोबिया: यह समस्या उस समय आती है जब कोई व्यक्ति यह सोच कर डरने लगता है कि फोन के बिना वह कैसे रहेगा।
टेक्स्टाफ्रेनिया: इसमें व्यक्ति को यह डर सताने लगता है कि मोबाइल फोन से वह कोई टेक्स्ट न तो भेज सकेगा या रिसीव कर सकेगा।
फेंटम वाइब्रेशन: इस समस्या में व्यक्ति को ऐसा लगने लगता है कि उसका फोन उसे अलर्ट कर रहा है जबकि असलियत में ऐसा होता नहीं है।
अगर आपके साथ भी इस प्रकार की समस्याएं पेश आ रही हैं तो फौरन अपने डॉक्टर से मदद लें। घरवालों से बातचीत करें और उन्हें अपनी समस्या के बारे में बताएं। सबसे सही उपाय यह होगा कि कहीं घूमने के लिए चले जाएं और उस अंतराल में फोन को घर पर ही छोड़ जाएं। फोन से एक समस्या की दूरी आपको इसके जरूरत से ज्यादा प्रयोग से बचाएगी। घरवालों या बच्चों के साथ समय बिताएं लेकिन ध्यान रहे कि यह समय फोन से जुड़ा न हो जैसे कि आप बच्चों के साथ फिल्म या कोई कार्टून देखना चाहते हैं मगर उसके लिए आपने मोबाइल फोन को ही मीडियम चुना तो आपके प्रयास सही साबित नहीं होंगे।





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