अलवर. दीपावली त्योहार आपस में मिलकर खुशियां मनाने का है, इस दिन लोग दूरदराज से अपने घरों को लौट अपनों के संग खुशियां मनाते हैं, लेकिन राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए इस दीपावली पर भागदौड़ बढ़ गई है। इसका कारण है कि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दीपावली त्योहार दो दिन पूर्व ही निकाय चुनाव की घोषणा करना रहा है। निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद जिले की राजनीति में एकाएक उबाल आ गया है। राजनीतिक दलों के कार्यालय व पार्टी पदाधिकारियों और विधायकों के निवास पर टिकट के दावेदारों की भीड़ जुटने लगी है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने गत शुक्रवार को निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इसी के साथ ही जिले में निकाय चुनाव की राजनीति परवान पर चढऩे लगी है। चुनाव की घोषणा के अगले दिन ही कांग्रेस व भाजपा नेताओं की सक्रियता एकाएक बढ़ गई। पार्टी नेताओं के मंत्रणा के दौर शुरू हो गए, वहीं नेता, विधायक व मंत्री को टिकट के आवेदन देने वालों की कतार लगना शुरू हो गई।
त्योहार की तैयारी छोड़ टिकट की चिंता सताई
निकाय चुनाव में पार्षद पद के दावेदार दीपावली त्योहार की तैयारी छोड़ अपने टिकट के प्रयास में जुट गए हैं। टिकट के दावेदार छोटी दीपावली को घरों में त्योहार की तैयारी में व्यस्त रहने के बजाय, सुबह से ही नेताओं के घर व कार्यालयों में पहुंच गए। दावेदारों का नेताओं के यहां पहुंचने का क्रम देर रात तक जारी रहा। हालांकि टिकट के दावेदार नेताओं के यहां दीपावली की शुभकामना देने के नाम पर पहुंचे और मिठाई खिलाकर निकाय चुनाव में दावेदारी जताई।
पार्टी के नेता भी चुनावी तैयारी में दिखे व्यस्त
कांग्रेस व भाजपा के ज्यादातर नेता दीपावली त्योहार के बावजूद निकाय चुनाव की तैयारी को लेकर व्यस्त दिखे। पार्टी नेता दीपावली की शुभकामना देकर दावेदारी जताने वाले कार्यकर्ताओं से वार्ड में पार्टी की स्थिति, वोटों को गणित व जातीय समीकरण पर चर्चा करते दिखाई दिए। इसके अलावा प्रमुख दलों के नेता, विधायक व पदाधिकारी अपने स्रोतों से निकाय चुनाव को लेकर वार्डों में लोगों की नब्ज टटोलने के कार्य में जुटे दिखाई दिए।
चिंता यह त्योहार मनाएं या चुनाव की चिंता करें
प्रमुख दलों के नेताओं के समक्ष इन दिनों सबसे चिंता निकाय चुनाव की है। हालांकि नेताओं का यह दर्द बातचीत में उजागर भी हो रहा है। प्रमुख नेताओं व पदाधिकारियों का कहना है कि निकाय चुनाव की घोषणा दीपावली से ऐन पहले होने के कारण त्योहार की तैयारी भूल गए हैं। उनकी बड़ी चिंता है तो निकाय चुनाव की तैयारी और टिकटों का बंटवारा है। कारण है कि आगामी एक नवम्बर से निकाय चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का कार्य शुरू होना है और नामांकन 5 नवम्बर तक ही दाखिल हो सकेंगे। ऐसे में प्रत्याशी चयन प्राथमिकता है।
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