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ऐसे तो सुधर गया जनजाति क्षेत्र के भविष्य का शिक्षा स्तर

उदयपुर/ कोटड़ा (पसं.) tribal school अंधेरगर्दी की भी हद है! जनजाति उपयोजना क्षेत्र के राजकीय विद्यालयों में भविष्य बनाने की दुहाई देने वाली प्रदेश की सरकार शिक्षकों की कमी को लेकर आंखें मूंदे हुई है। जिले का शिक्षा विभाग भी भविष्य से जूझ रहे विद्यार्थियों को लेकर अनदेखी कर रहा है। ऐसे में जनजाति क्षेत्र में शिक्षा का स्तर सुधारने के सभी दावे धरातल पर फेल हो रहे हैं। सरकारी अनदेखी के इसी सच को जानने के लिए पत्रिका के इस संवाददाता ने कोटड़ा उपखण्ड मुख्यालय सिथत राउमावि का ढर्रा जानने का प्रयास किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कुल स्वीकृत 37 शिक्षकों वाले इस विद्यालय में करीब 362 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए केवल 7 शिक्षक की सक्रिय हैं। इनमें भी 5 तृतीय श्रेणी के स्तर के हैं, जो कि बड़ी कक्षाओं में अध्यापन कार्य को लेकर सक्षम नहीं हैं। इसी तरह एक द्वितीय श्रेणी स्तर का तो दूसरा अधिकृत तौर पर व्याख्याता है। स्कूल की जिम्मेदारी ढोने वाला प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। एक मात्र क्लर्क का पद भी लंबे समय से रिक्त है। सरकारी कामकाज को लेकर द्वितीय श्रेणी अध्यापक व्यस्त रहता है। ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर तैयारी कर रहे 10वीं व 12वीं कक्षाओं के विद्यार्थियों के भविष्य के सामने अंधेरा पसरा हुआ है। परीक्षा परिणाम को लेकर विद्यालय का पुराना इतिहास भी अच्छा नहीं है।

हिन्दी पढ़ाने वाला ही नहीं
विद्यालय में अंग्रेजी, गणित व विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयाध्यापक तो दूर मातृभाषा पढ़ाने वाले हिन्दी के अध्यापकों का ही अभाव है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब विद्यालय के छात्रावास में अध्ययन के लिए रहने वाले बच्चे घर से दूर भविष्य बनाने के लिए बचपन से संघर्ष कर रहे हैं। बता दें कि टीएसपी क्षेत्र को लेकर बहुत से अध्यापकों का तबादला हुआ, जो बिना देर लगाए रिलीव हो गए, लेकिन यहां आने वाले अध्यापकों ने अब तक भी जोइनिंग नहीं दी है।

अधरझूल में बालिकाओं का भविष्य
क्षेत्र के एक मात्र कन्या विद्यालय का भविष्य भी अच्छा नहीं है। छात्रावास में रहकर भविष्य में कुछ बनने की चाह रखने वाली बालिकाओं को विद्यालय में शिक्षकों की कमी से जूझना पड़ रहा है। यहां करीब 30 स्वीकृत पदों के जवाब में महज 8 कार्मिक ही सेवाएं दे रहे हैं। इनमें 3 व्याख्याता, 2 द्वितीय श्रेणी और 5 तृतीय श्रेणी के शिक्षक हैं। यहां पर भी प्रधानाचार्य का पद रिक्त बना हुआ है।

तबादलों से बिगड़ा ढर्रा
तबादलों के बाद से स्कूलों में शिक्षकों की संख्या का आंकड़ा गड़बड़ा गया है। इस क्षेत्र में हुए तबादलों के बाद शिक्षकों ने अब तक जोइनिंग नहीं दी है। उनकी ओर से मेडिकल दिए जा रहे हैं। tribal school हालांकि, शिक्षा निदेशक के आदेश हैं कि ऐसे अध्यापकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय की जाए।
शिवजी गौड़, संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, उदयपुर



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