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एक तरफ पुलिस पढ़ा रही यातायात का पाठ, दूसरी ओर उड़ रही नियमों की धज्जियां

प्रतापगढ़. जिलेभर में नए मोटर व्हीकल एक्ट लागू करवाने और सडक़ दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए पुलिस की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता का अभियान का भी लगता है, कोई लाभ नजर नहीं आ रहा। वाहन चालक जिले में यातायात नियमों की लगातार अवहेलना करते नजर आ रहे हैं।
पुलिस प्रशासन की ओर से 14 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक वाहन चालकों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने को लेकर अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन प्रशासन की सख्ती के बाद भी शहर में लोग बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, मोटरसाइकिल पर तीन सवारी बिठाकर सडक़ों पर पुलिस के सामने ही धड़ल्ले से यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए निकल रहे हैं। पुलिस के सामने लोग गलत दिशा में चल रहे हैं। यातायात पुलिस की ढिलाई से लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। पुलिस की ओर से अभियान के तहत जरूर थोड़ी बहुत कार्रवाई की जा रही है, फिर भी आमजन में जागरूकता की कमी है।
ओवर लोडिंग वाहनों के कारण हो रहे हादसे
शहर सहित जिले भर में सडक़ हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। लगातार हो रही सडक़ दुर्घटनाओं से भी लोग सबक नहीं ले रहे हैं। तेज रफ्तार वाहनों पर किसी का नियंत्रण नहीं है। इस कारण वाहन चालकों में किसी का खौफ भी नहीं है। जिला मुख्यालय से ग्रामीण इलाकों में चलने वाले टैम्पो ओवरलोड चल रहे है, लेकिन इन पर रोक नहीं लग पा रही है। इसके साथ वाहनों की तेज रफ्तार से दौडऩे वाले वाहन भी दुर्घटना का कारण बनते हैं। जिन पर आज तक कोई प्रभावी रोक लगाने के प्रयास नहीं किए गए हैं। इन दिनों त्योहारी सीजन चल रही है, जिसको लेकर कई ग्रामीण इलाकों से बारात में जाने वाले लोग ओवरलोड वाहनों में सफर कर रहे है। लेकिन पुलिस की ओर से इन पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। बाबजूद इसके इस मार्ग पर नियमों की अनदेखी कर वाहन सरपट दौड़ते हैं।

नियमों से खिलवाड़
वाहनों का मनमाना संचालन, ओवर लोडिंग यहां सबसे अधिक है। ट्रैक्टर-ट्राली का उपयोग कृषि कार्य के लिए रजिस्टर्ड होने वाले और इसी कार्य के लिए उपयोगी ट्रैक्टर-ट्राली ग्रामीणों के आवागमन का साधन होने के साथ व्यावसायिक उपयोग का भी साधन बने हैं। ये वाहन अक्सर दुर्घटना का कारण बनते हैं। ट्रॉली का व्यावसायिक उपयोग आए दिन लोगों की जान पर बन रहा है। जिले में बीते दिनों टैक्ट्रर-ट्राली से कई हादसे हो चुके है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इन वाहनों के गलत उपयोग पर न तो पाबंदी लगाते हैं, न कोई कार्रवाई की जाती है। ग्रामीण क्षेत्र में ट्रैक्टर का उपयोग होता है।

सुरक्षा उपकरण भी नहीं
अधिकांश वाहनों में हादसे से बचने के उपकरण नहीं हैं। शहर से होकर जाने वाले छोटे-बड़े सवारी वाहन जीपों, मैजिक ऑटो और बस मिनी बसों में न तो अग्निशमन यंत्र हैं और न ही फस्र्ट एड बॉक्स ही रखे जा रहे हैं। इससे तुरंत उपचार या बचाव के कोई इंतजाम नहीं होते है।

ओवर लोड टैम्पों पर नहीं है लगाम
जिला मुख्यालय से संचालित होने वाले सालों पुराने जर्जर और कंडम हो चुके टैम्पो रोजाना पुलिस की आंखों के सामने से होकर गुजर रहे है। इन ओवरलोड टैम्पोंं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

बच्चों के हाथ में वाहन
शहर में इन दिनों बच्चों के हाथ में दो पहिया वाहन सबसे ज्यादा देखे जाते हैं। जल्दी आने-जाने की जल्दबाजी में बच्चे जिस स्पीड व जिस तरीके से वाहन चलाते हैं, उसमें सडक़ हादसों की संभावनाएं ज्यादा बन रही हैं। अधिकारियों का भी मानना है कि सबसे ज्यादा सडक़ हादसे तेज गति से दो पहिया वाहन चलाने से होते हैं। दूसरा यातायात के नियमों का कड़ाई से पालन नहीं करना हादसों की वजह है। फिर भी नाबालिग बच्चे तेज रफ्तार से वाहन चलाकर निकलते है।



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