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फैक्ट्री से पोर्ट तक जाने वाले कंटेनर का भाड़ा होगा कम

जोधपुर।

केन्द्र सरकार हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग को मंदी से उबारने के नई योजना ला रही है। देश का निर्यात उद्योग, अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके, इसके लिए लॉजिस्टिक्स कॉस्ट यानि निर्यात के लिए फैक्ट्री या इनलेण्ड कंटेनर डिपो (आइसीडी) से पोर्ट तक भेजे जाने वाले कंटेनर्स के भाड़े को कम को कम किया जाएगा। ताकि निर्यातक पर कंटेनर भाड़े के रूप में पडऩे वाला आर्थिक बोझ कम होगा।प्रधानमंत्री कार्यालय ने देश में लॉजिस्टिक्स की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए पिछले दिनो एक मीटिंग बुलाई थी। जिसमेंलॉजिस्टिक्स के माहौल को बेहतर बनाने के लिए कस्टम, कृषि, टेक्सटाइल, हैण्डीक्राफ्ट और ट्रांसपोर्ट सहित विभिन्न विभागों और मंत्रालयों को अपने सिस्टम को बेहतर बनाने का लक्ष्य दिया है।

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केवल जोखिम वाले कंटेनर्स की ही जांच

नई योजना में देश में केवल जोखिम वाले कंटेनर को ही जांच के लिए रोका जाएगा। अन्य कंटेनर्स को नो यूज बॉन्ड या किसी अन्य उपयुक्त तरीके के आधार पर क्लियर कर दिया जाएगा। नो यूज बॉन्ड से कंटेनर को फैक्ट्री में ले जाने की अनुमति मिलती है। जोखिम वाले कंटेनर वे माने जाएंगे, जिन निर्यातको का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट लाइसेंस सरकार ने संदेहास्पद माना है। इनके अलावा जिनका जीएसटी सर्टिफिकेश नहीं हुआ हो, जिन निर्यातकों ने जीएसटी की सही गणना नहीं की हो या जीएसटी मिसमैच वाले कंटेनर जोखिम वाले कंटेनर में शामिल होंगे।

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20 फीट कंटेनर का भाड़ा करीब 20 हजार रुपए

- 40 फीट कंटेनर का भाड़ा करीब 40 हजार रुपए

- 03 हजार करोड़ सालाना हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों का निर्यात

- 03 हजार कंटेनर प्रतिमाह निर्यात होते है जोधपुर से

-700 रजिस्टर्ड हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक

- 30 प्रतिशत निर्यात हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों का देश के कुल निर्यात में

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निर्यातकों को लॉजिस्टिक्स के रूप में प्रोत्साहन की शीघ्र जरूरत है । सरकार लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने की दिशा में काम करे तो देश का निर्यात निश्चित ही बढेगा ।

डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष

जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन



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