बीकानेर. शिक्षा विभाग ने तीन साल पूर्व करीब छह हजार माध्यमिक स्कूलों को उच्च माध्यमिक विद्यालयों में क्रमोन्नत किया था। इसमें वर्ष 2013-14 में 1086 ६ और 14-15 में एक साथ पांच हजार स्कूल क्रमोन्नत किए गए थे। इन विद्यालयों में उस समय वैकल्पिक विषयों के व्याख्याताओं के पद स्वीकृत करने के लिए सरकार ने कहा था।
इसमें हिन्दी व अंग्रेजी विषय के पद स्वीकृत होने थे, लेकिन तीन वर्ष बाद भी 6086 विद्यालयों में अनिवार्य विषय के पद स्वीकृत नहीं हुए। इससे इन स्कूलों में वरिष्ठ अध्यापकों को उच्च माध्यमिक कक्षा में अध्यायपन का कार्य करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर राज्य सरकार ने स्टाफिंग पैटर्न लागू कर दिया जिसमें कहा गया है कि जिन उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 11 व 12 वीं में नामांकन 80 से अधिक होगा, वहां अनिवार्य विषयों के पद दिए जाएंगे। इसके आधार पर भी यदि भर्ती होती है, तो भी महज चार हजार पद ही स्वीकृत हो सकेंगे।
नहीं हो रही है सुनवाई
राजस्थान एलीमेन्ट्री एंड सैकंडरी टीचर एसोसिएशन का कहना है कि तीन साल बीतने के बाद भी सरकार ने अनिवार्य विषय के व्याख्याताओं के पद स्वीकृत नहीं किए है। इससे वरिष्ठ अध्यापकों को ही उच्च माध्यमिक स्तर की कक्षाएं लेनी पड़ रही है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह ने बताया कि संगठन स्तर पर लगातार इन पदों की स्वीकृति की मांग उठाई जा रही है। पूर्व में इसको लेकर धरना भी दिया गया था, लेकिन सुनवााई नहीं हो रही है।
इसलिए जरूरी
अंग्रेजी विषय पर बच्चों की पकड़ मजबूत हो इसके लिए जरूरी है कि इस विषय के व्याख्याताओं के पद स्वीकृत किए जाएं। प्रदेश में हिन्दी और अंग्रेजी विषयों के करीब 12 हजार से अधिक पद स्वीकृत करने की दरकार है। इससे वरिष्ठ अध्यापकों को पदोन्नति का अवसर मिलेगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में 10 हजार 222 उच्च माध्यमिक विद्यालय है, इनमें हिन्दी अनिवार्य व्याख्याताओं के ३ हजार 793 पद स्वीकृत है, जिसमें 390 पद रिक्त है। इसी तरह अंग्रेजी अनिवार्य के करीब 4 हजार 80 पद स्वीकृत है, जिसमें 559 पद रिक्त बताए जा रहे हैं।
रिव्यू होने के बाद आएगी स्वीकृति
क्रमोन्नति के दो साल बाद अनिवार्य विषय के व्याख्यात दिए जाते है। लेकिन स्टाफिंग पैटर्न को लेकर रिव्यू अभी नहीं हुआ है। इसके बादतीन हजार व्याख्याताओं के पद स्वीकृत किए जाने की आवश्यकता है। उसकी स्वीकृति आने के बाद ही स्कूलों में पद दिए जाएंगे।
नथमल डिडेल, निदेशक, मा.शिक्षा, बीकानेर





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