उदयपुर. NGO एशिया लैंड फोरम ने वैश्विक स्तर पर हमारी भूमि-हमारी पहचान की लड़ाई को आगे ले जाने और अन्याय से लडऩे के लिए हमें प्रेरणा और ऊर्जा प्रदान की है। अंतरराष्ट्रीय भूमि गठजोड़ के निदेशक माइक टेलर ने कहा कि गुरुवार को फोरम का समापन हो रहा है। इसमें शामिल 12 देशों के अंतरराष्ट्रीय भूमि गठजोड़ सदस्य 4 दिनों के सक्रिय कार्यक्रमों से उत्साहित और ऊर्जा से भरपूर होकर स्वयं के देश लौट रहे हैं। फोरम के पहले दिन 1200 महिला और पुरुषों, जो अलग अलग कार्यक्षेत्रों, सामाजिक संगठनों, मीडिया, शोध, और सरकारी विभागों से थे, ने कार्यक्रम में हिस्सेदारी निभाई। एशियायी किसान संघ, फिलीपिंस के राउल सोक्रेट्स ने कहा कि ऊर्जा और भारतीय समुदायों, आदिवासी महिलाएं, पुरुषों और युवाओं और अन्य एशियाई सदस्यों से सीख से भरपूर थे। हमने सीखा है कि जेंडर समानता के साथ जन केंद्रित भूमि प्रशासन की लड़ाई लंबी है। बीच में हम शिथिल नहीं हो सकते।
कार्यक्रम के दूसरे दिन भारत और अन्य एशियाई देशों के 200 लोगों ने भूमि अधिकार कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों से चारागाह भूमि, महिलाओं और युवाओं के भूमि अधिकार, भूमि सुधार, भूमि के आकंड़ों की उपलब्धता और पारदर्शिता पर चर्चा की। चर्चा में यह बात आई कि जन केंद्रित भूमि प्रशासन के लिए समुदायों, खासकर महिलाओं को केंद्र में लाना होगा। चौथे दिन गठजोड़ सदस्य उदयपुर जि़लेके चार गांवों, सगतड़ी, थामला बेरी, खाखरा खुणा, करेज और वाली गए, जहां ग्रामीण आदिवासी समुदायों से मिले और उनके संघर्ष और सफलताओं की कहानी सुनी। मंगोलिया से आई खिजाबा यखना ने कहा कि सगतड़ी गांव के लोगों का संघर्ष मंगोलिया के लोगों के संघर्ष से अलग नहीं है। हम एक गठजोड़ के नाते साथ साथ हैं। NGO गांव वालों ने हमें चरागाह भूमि को बचाए रखने का तरीक़ा सिखाया, जो वो 30 सालों से करते आ रहे हैं।





No comments:
Post a Comment