उदयपुर/ गोगुंदा. jholachhap doctors झोलाछाप की लापरवाही से जसवंतगढ़ निवासी महिला की मौत का शोर अभी थमा भी नहीं है कि एक अन्य झोलाछाप की नादानी ने दो साल की मासूम बच्ची को जिंदगी देखने से पहले ही मौत के मुंह में धकेल दिया। नया मामला गोगुंदा कोटड़ा के देवला से जुड़ा हुआ है। गलत उपचार से हुई बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने बेकरिया थाने में मामले दर्ज कराया है। रिपोर्ट के अनुसार सायरा के जोरिया गांव निवासी कानाराम गमेती की दुधमुंह दो वर्षीय बच्ची भाग्यवंती को मौसमी बीमारियों के दौर में बुखार की शिकायत थी। बच्ची की खराब तबीयत से चिंतित कानाराम की पत्नी मीरा ने समीपवर्ती झोलाछाप से उपचार कराया। यहां बंगाली चिकित्सक की ओर से लगाए गए इंजेक्शन से बच्ची तड़पने लगी। उसकी तबीयत एकाएक और बिगड़ गई। परिजन उसे उदयपुर चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां उसने दम तोड़ दिया। गौरतलब है कि जसवंतगढ़ में हुई महिला की मौत के बाद स्थानीय प्रशासनिक अमले ने झोलाछाप चिकित्सकों को लेकर सख्ती का सगूफा छोड़ रखा है। बावजूद इसके प्रशासनिक अधिकारी और चिकित्सा विभाग झोलाछाप चिकित्सकों के गलत उपचार से बेमौत मारे जा रहे लोगों को बचाने में विफल साबित हो रहा है। कुकुरमुत्तों की तरह क्षेत्र में झोलाछापों की दुकानें चल रही है।
मामले की जानकारी नही
ंफिलहाल बच्ची की मौत को लेकर मुझे कोई जानकारी नहीं है। jholachhap doctors बिना देर लगाए झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। टीम गठित कर अन्य जगहों पर भी धरपकड़ होगी।
डॉ. शंकर चव्हाण, ब्लॉक चिकित्साधिकारी, कोटड़ा
पत्रिका व्यू...
कब रूकेगा मौतों का सिलसिला
अनपढ़ और झोलाछाप चिकित्सकों की कुकुरमुत्तों की तरह पनप रहे व्यापार से हो रही मौतों का सिलसिला आखिर कब थमेगा। उपचार के नाम पर 'यमराजÓ बने बैठे झोलाछापों को लेकर प्रशासनिक अमले की चुप्पी कब तक निर्दोषों की जानें लेती रहेगी। चिकित्सा विभाग कब जाकर जिम्मेदारी समझेगा। राजकीय चिकित्सालयों में कब बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। कब गरीब तबके को बेहतर उपचार के सरकारी दावें पूरे होंगे। ऐसे कई सवालों का जवाब तो फिलहाल किसी के पास नहीं है, लेकिन चिकित्सा विभाग और उपखण्ड प्रशासन अगर, मुस्तैदी दिखाए तो गरीबों की जिंदगी से होने वाले खिलवाड़ को रोक सकता है। फिलहाल तो सख्ती से निर्णय लेने की जरूरत है और बिना शोर मचाए झोलाछापों को सलाखों के पीछे पहुंचाने की आवश्यकता है।
सुगबुगाहट मात्र से भाग छूटे झोलाछाप
उदयपुर/ झाड़ोल. प्रशासनिक अमले की सख्ती से झोलाछापों की दुकानों पर संकट आ खड़ा हुआ है। मरीजों की उपस्थिति के बावजूद झोलाछाप छिपते फिर रहे हैं। कानूनी कार्रवाई के भयभीत होने का एक नजारा बुधवार को देखने को मिला, जब ओगणा इलाके में उपखण्ड अधिकारी डॉ. टी शुभमंगला के पहुंचने की सुगबुगाहट मात्र से झोलाछापों के एक दर्जन करीब क्लीनिकों पर एक के बाद एक कर शटर गिरने लगे। मरीजों को देखते हुए झोलाछाप एकाएक मौका छोड़कर भागने लगे। हालांकि, ये सब कुछ हवा मात्र था। झोलाछापों को छिपता देख मरीज राजकीय चिकित्सालयों में पहुंचे, जहां उन्होंने उपचार कराने में विश्वास दिखाया। दूसरी ओर देर शाम तक एसडीएम के मौके पर नहीं पहुंचने पर झोलाछापों ने राहत की सांस ली। गौरतलब है कि बीते करीब 5 दिन से प्रशासनिक स्तर पर झोलाछापों पर शिकंजा कसा जा रहा है। jholachhap doctors एसडीएम स्तर पर होने वाली कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।





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