उदयपुर/ सराड़ा. samudaik swasth kendra कहावत है कि 'नया नौ दिन और पुराना सौ दिनÓ। लेकिन, जिला चिकित्सा विभाग की ग्रामीण स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता ने पुराने सभी अनुभवों को सिरे से खारिज कर दिया है। यानी कि जिले का सबसे पुराने चिकित्सालय का तमगा प्राप्त सराड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ग्रामीणों को अपेक्षा के अनुपात में स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही है। करीब एक सौ साल पुराने स्वास्थ्य केंद्र पर चार चिकित्सक सहित स्वीकृत कुल 21 पद के जवाब में 11 चिकित्सा कार्मिकों का स्टाफ ही सेवाएं दे रहा है। समस्या से दूरदराज से आने वाले ग्रामीणों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। खामी ही है कि केंद्र में रखी हुई लाखों लागत की एक्स-रे मशीन यहां धूल खा रही है। विभागीय खामी ही है कि औसत 100 से अधिक प्रसव होने के बाद भी यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ जैसी सुविधा नहीं है। गौरतलब है कि रियासत काल में जिला मुख्यालय रहे सराड़ा स्वास्थ्य केंद्र से पाल सैपुर, निंबोदा, वायरी, सैपुर, केजड़, सगतड़ा, बलुआ, पाल सराड़ा, ढाकरडा सहित पूरे उपखण्ड क्षेत्र के ग्रामीण यहां आते हैं।
स्टाफ की स्थिति
पद का नाम स्वीकृत रिक्त
चिकित्सक 04 01
नर्स 08 02
वार्ड बॉय 02 01
सफाई कर्मी 01 01
एएनएम 01 01
लैब टेक्निशियन 01 01
कनिष्ठ लेखाकार01 01
वरिष्ठ लेखाकार 01 01
कनिष्ठ लिपिक 01 01
वरिष्ठ लिपिक 01 01
कहता है आंकड़ा
केंद्र का नाम: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सराड़ा
स्थापना: वर्ष 1928
स्वीकृत कर्मचारी संख्या: पद 21
रिक्त पदों की संख्या: 11
वाहन सुविधा: 108 व 104 एंबुलेंस
मशीनरी: जांच की सुविधा, एक्स-रे मशीन है पर चालू नहीं
पेरीफ ेरी के गांव: यूं तो पूरे उपखण्ड क्षेत्र से ग्रामीण सीएचसी पर आते हैं, लेकिन पेराफेरी में बलुआ, निंबोदा, सुरखण्ड का खेड़ा, पाल सराड़ा, सैपुर, खरबर, केजड़, सगतड़ा, कछौटा, कोलर
केंद्र का दूरस्थ गांव: करीब 30 किमी
प्रतिदिन की रोगी संख्या: 350 के करीब
प्रति माह प्रसव: 100 के करीब
दे रखी है जानकारी
स्टाफ की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। samudaik swasth kendra सीएचसी पर आने वाले हर रोगी का उपचार किया जाता है।
डॉ.सईद अहमद, चिकित्सा प्रभारी, सराड़ा





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