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अंधेरगर्दी में सता रही है इन नन्हे-मुन्नों की चिंता

उदयपुर/ फलासिया. anganbadi center खेरवाड़ा में स्कूली बच्चों की मौत की घटना के बाद से जर्जर भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन पर भी सवाल उठ रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से क्षेत्र में संचालित 134 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 47 के अपने भवन नहीं है। वहीं करीब २१ आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हाल दीवारों वाले भवनों में संचालित है। हाल ही में सरकारी स्कूल में हुई घटना के बाद से लोग बच्चों को ऐसी आंगनबाड़ी में भेजने से कतरा रहे हैं तो कुछ जगहों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मामले को लेकर गंभीर हैं। लेकिन, कई जगहों पर राजकीय दायित्वों को लेकर विभागीय प्रतिनिधि और कार्यकर्ता, स्वयं के साथ बच्चों को जोखिम में डालकर केंद्र गतिविधियों को अंजाम दे रही हैं। गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने जर्जर राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को नहीं बिठाने के आदेश तो दिए, लेकिन नन्हें-मुन्नों वाली जर्जर आंगनबाडिय़ों को लेकर फिलहाल कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए हैं।

यहां है जर्जर हाल
बेडऩपाड़ा प्रथम, खाटी कमदी, बिजली, पीपलबारा, पारगीयापाड़ा, उमरिया, ठाडीवेरी, कवेल, आमलिया द्वितीय, नागमाला, कोल्यारी प्रथम, ढाला, घोडीमारी, कूपड़ा, डैया, कवेल, पानरवा , मानपुर, धरावण, नालवा व आमडा आंगनवाड़ी केन्द्र ऐसे हैं, जिनके भवनो में कहीं दरारें हैं तो कहीं पानी टपकने की समस्या है।

भेजे हैं प्रस्ताव

खस्ताहाल भवनों में संचालित अंबासा, छाली बोकड़ा आंगनबाड़ी केंद्र को लेकर बजट मिला था। ये कार्य पूरा करा दिया है। शेष के प्रस्ताव भेजे हुए हैं। स्वीकृति के साथ कार्य को अंजाम दिया जाएगा। बगैर भवन वाली अंागनबाड़ी के प्रस्ताव भी भेजे हुए हैं।
अशोक डिन्डोर, सीडीपीओ, फलासिय

गंभीर है समस्या
आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन पुराने ग्राम पंचायत भवन में हो रहा है। पंचायत स्तर पर मरम्मत के बाद भी छत टपक रही है। बच्चों को बैठने में दिक्कत ही नहीं आ रही। anganbadi center बल्कि दीवार पर लगाए गए पोस्टर भी उखड़कर खराब हो रहे हैं।
कमला मेघवाल, आगनवाड़ी कार्यकर्ता, भैसाणा



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