अलवर. रियासत काल समय पूर्व राजघराने की ओर से रोशनी का त्योहार दीपावली श्रद्धा और परंपरा के अनुसार मनाया जाता था। दीपावली के त्योहार जो मुख्य रूप से अक्टूबर और नवंबर में कार्तिक बदी अमावस्या को मनाया जाता है। उस दौरान दीपोत्सव त्योहार पर रोशनी से बाजार और घर को रोशनी से जगमग किया जाता था। इसके साथ भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी की पूजा अर्चना राजर्षि सवाई पूर्व महाराज जय सिंह श्रद्धा से तोष खाना और कोषागार में करते थे। जहां पर पूर्व राज गुरु, कुल गुरु और आचार्य मौजूद रहते थे। पूजा अर्चना के बाद भगवान विष्णु से पूर्व राज परिवार पूरे वर्ष भर राज शासन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते। दीपोत्सव के इस त्योहार के दूसरे दिन रियासतकालीन अलवर पूर्व राजघराने के दुकानदार नई खाता बही का संचालन कर, नए खाते खोलते तथा इमानदारी के साथ भगवान से प्रार्थना करते कि उनका कारोबार फले फुले और पूर्व रियासत में सुख समृद्धि बनी रहे। दीपोत्सव के त्योहार पर रोशनी की जगमगाहट से सुंदर रूप से श्रृंगारित शहर का भ्रमण करने के लिए पूर्व महाराज हाथी गाड़ी में बैठकर निकलते थे। दीपोत्सव के त्योहार पर जिले के सभी बुर्ज, किले रोशनी से जगमग रहते थे। पूर्व राज परिवार की ओर से इस त्योहार पर मिठाई का वितरण दूसरे दिन किया जाता। दीपावली त्योहार परंपरागत तरीके से पूर्व रियासत काल से ही अलवर में मनता आ रहा है।
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