अलवर. हरियाणा चुनाव परिणाम ने अलवर जिले में राजनीतिक पार्टियों को निकाय चुनाव के लिए रणनीति बदलने को मजबूर कर दिया है। अभी तक प्रमुख दल राष्ट्रीय मुद्दों पर सवार होकर निकाय चुनाव की वैतरणी पार करने की रणनीति बनाने में जुटे थे, लेकिन हरियाणा चुनाव परिणाम में राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय स्थानीय मुद्दे असरकारक साबित होने से भाजपा व कांग्रेस फिर से निकाय चुनाव की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम गत गुरुवार को घोषित हुए हैं। इन चुनाव परिणाम ने देश भर की राजनीति को झकझोर दिया है। हरियाणा चुनाव में राष्ट्रीय दलों ने ज्यादातर राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को चुनाव में जीत का हथियार बनाया था, लेकिन चुनाव परिणाम आशानुकूल नहीं रह पाए। हरियाणा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सभाएं हुई। इन सभाओं में ज्यादातर नेताओं ने राष्ट्रीय मुद्दों पर बात की। इन चुनाव में स्थानीय नेता जरूर क्षेत्रीय मुद्दों को उठाते दिखे, लेकिन चुनाव परिणाम राष्ट्रीय मुद्दों की हवा के विपरीत रहे।
निकाय चुनाव में भी राष्ट्रीय मुद्दों से नैया पार लगने की थी उम्मीद
अभी तक जिले में राष्ट्रीय पार्टियों को निकाय चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे हावी रहने की उम्मीद थी, लेकिन हरियाणा चुनाव परिणाम ने राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा चलते नहीं देख अब प्रमुख वापस स्थानीय मुद्दों को लेकर चुनाव की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। राष्ट्रीय मुद्दे चुनाव परिणाम में भले ही ज्यादा असरकारक नहीं रह पाए हो, लेकिन प्रमुख दलों को उम्मीद है कि निकाय चुनाव के दौरान ये राष्ट्रीय मुद्दे उनके दल के प्रति चुनावी हवा बनाने में जरूर सहायक होंगे।
निकाय चुनाव में वार्ड स्तर के मुद्दे जरूरी
निकाय चुनाव के तहत अभी पार्षद के चुनाव होने हैं। इन चुनाव में वार्ड से जुड़े लोग ही प्रमुख दलों के प्रत्याशी होंगे। साथ ही मतदाता भी वार्ड स्तर के ही होंगे। इस कारण चुनाव प्रचार के दौरान वार्ड स्तर के मुद्दे ही चुनाव में उठने और प्रभावी होने की उम्मीद है। इसी उम्मीद के चलते प्रमुख दलों ने वार्ड स्तर की समस्याओं को एकत्र कर चुनावी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है।
निकाय चुनाव में बड़े नेताओं के दौरे कम
निकाय चुनाव स्थानीय स्तर के होने से बड़े नेताओं के दौरे व सभाएं कम होने की उम्मीद है। इन चुनाव में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के दौरे व सभाओं की संभावना नगण्य हैं। वहीं प्रदेश स्तरीय नेताओं की सभाओं का भी अभी कोई कार्यक्रम नहीं है। इन चुनाव में मुख्य भूमिका स्थानीय नेताओं की रहने की संभावना है। अधिकतम पार्टियों के जिलाध्यक्ष, मण्डल अध्यक्ष, विधायक एवं अन्य स्थानीय स्तर के नेताओं की भूमिका ज्यादा रहने की उम्मीद है।
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