अलवर. economicdownfall in alwar बाजारी मंदी के दौर में अलवर जिला पहले की तुलना में निचले पायदान पर खिसक गया है। यही कारण है कि सरकार को मिलने वाले कर में भी कमी आई है। मंदी के इस दौर में औद्योगिक इकाइयां भले ही ज्यादा बंद नहीं हुई हो, लेकिन उनमें उत्पादन की मात्रा तेजी से घटी है। इसी का नतीजा है कि औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार की समस्या भी बढ़ी है।
राजस्थान की औद्योगिक राजधानी कहा जाने वाला अलवर जिला इन दिनों बाजारी मंदी के दौर से गुजर रहा है। बाजारी मंदी यानि बाजार में लोग पैसा खर्च करने से हाथ खींचने लगे हैं। जिससे बाजार में खरीददारी प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर सरकार को मिलने वाले टैक्स में कमी के रूप में सामने आया है।
economicdownfall in alwar जिले में औद्योगिक इकाई ज्यादा
अलवर जिले में छोटे-बड़े करीब 12 औद्योगिक क्षेत्र हैं। औद्योगिक इकाइयों के मामले अलवर जिला प्रदेश में अग्रणी है। जिले में सबसे ज्यादा ऑटोमोबाइल व स्टील (आयरन) की यूनिट हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अलवर जिले में 160 ऑटोमोबाइल की प्रमुख यूनिट और 150 आयरन स्टील की मुख्य औद्योगिक इकाइयां हैं। संभाग के कुल राजस्व में अलवर जिला की ऑटोमोबाइल व आयरन यूनिट्स से 70 से 80 प्रतिशत राजस्व मिलता है।
जिले में 8 हजार से ज्यादा मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट्स
वाणिज्य कर विभाग में 40 हजार 842 डीलर कर दाता हैं। वहीं कई हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाई रजिस्टर्ड हैं। इसमें 8 हजार 350 मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट हैं, वहीं 23 हजार 500 ट्रेडर्स हैं।
टैक्स में आई कमी
औद्योगिक उत्पादन में कमी और बाजारी मंदी के चलते बीते एक साल में सरकार को मिलने वाले टैक्स में भी कमी आई है। वाणिज्य कर विभाग को सितम्बर 2018 में 10187.51 लाख रुपए का राजस्व कर के रूप में मिला था। वहीं साल सितम्बर 2019 में विभाग को 10538. 44 लाख रुपए का राजस्व मिल पाया। हालांकि कर वसूली में 3.44 लाख की ग्रोथ दर्ज की गई, लेकिन यह ग्रोथ इस साल करीब 4 हजार नई औद्योगिक इकाइयों के रजिस्ट्रेशन से आई है। जबकि वाणिज्य कर विभाग के अनुमान के आधार पर कर वसूली की वास्तविक ग्रोथ करीब 25 प्रतिशत तक पहुंचनी चाहिए थी। नए रजिस्ट्रेशन के दौरान औद्योगिक इकाइयों को कई प्रकार के चार्ज देने पड़ते हैं, इस कारण यह ग्रोथ दर्ज की गई है। कर विशेषज्ञों की मानें तो वाणिज्य कर विभाग के राजस्व में 15 से 20 प्रतिशत की कमी हुई है।
विशेषज्ञों की नजर में मंदी
लघु उद्योग भारती के जयपुर संभाग के अध्यक्ष हिमांशु महावर का मानना है कि वर्तमान समय वित्तीय क्षेत्र में करेक्शन फेज में है। जब से देश में सभी प्रकार के वित्तीय लेन देन आधार से किए हैं, तभी से लोगों ने हाथ खींच लिए। इसमें भी बड़ा रोल ट्रेडर्स का रहा है। अब खरीददारों के मन में भय है कि आधार से लिंक होने के कारण वह टै्रेकेबल है। इस कारण लोगों ने पैसे का प्रवाह रोक दिया है। इसमें जीएसटी की सख्ती का बड़ा रोल है। आगामी दिनों में जीएसटी में और सख्ती हो सकती है, इससे समस्या और बढ़ सकती है। औद्योगिक क्षेत्र में इकाई बंद होने के बजाय उनमें उत्पादन घट गया है, जिससे उनका कार्य समय भी कम हो गया है। लोगों में नियमानुसार आर्थिक काम काज की आदत बनने पर मंदी के बादल छंट जाएंगे।





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