उदयपुर/ झाड़ोल. medical and health department शहर मुख्यालय उदयपुर से सटे गिर्वा उपखण्ड क्षेत्र के अलसीगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल अपनों के बीच भी 'बेगानोंÓ जैसा है। कहे तो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के आला हुक्मरानों की नजदीकी के बावजूद इस क्षेत्र में रहने वाली आबादी से 'सौतेला व्यवहार हो रहा है। यह जानकर अचरज होगा कि पंाच हजार की छिछरी आबादी वाले पीएससी क्षेत्र में प्रतिनियुक्ति के कंपाउंडर के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जा रही है। पीएचसी बने एक साल बीत जाने के बावजूद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इस केंद्र को पर्याप्त चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ जैसी स्थायी सुविधा मुहैया कराने में फेल रहा है। स्टाफ की खामी का नुकसान ही है कि रात में नहीं दिन में भी इस पीएचसी पर सन्नाटा पसरा रहता है। मजबूरी में हर तबके के ग्रामीण को मामूली स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी शहर मुख्यालय आना पड़ता है।
छुट्टी पर चिकित्सक, व्यवस्था नहीं
राजस्थान पत्रिका के अभियान के तहत इस पीएचसी का हाल जानने पहुंचे संवाददाता के सामने चौंकाने वाली तस्वीर आई। चिकित्सक के अवकाश पर होने के दौरान कंपाउंडर चिकित्सक कक्ष में धड़ल्ले से मरीज पर्ची पर दवाइयां लिखता मिला। और जानकारी जुटाने पर सामने आया कि यहां नियुक्त चिकित्सक कैलाश गुर्जर पीएल छुट्टी पर हैं। सेवारत मेलनर्स तिलकराज चौधरी का एक अक्टूबर को तबादला हो चुका है। विभाग ने अस्थायी व्यवस्था के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नाई के मेल नर्स डीएस राजपूत को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रतिनियुक्ति पर जिम्मेदारी सौंपी। एक नवम्बर से मेल नर्स सेवाएं दे रहा है।
कहता है इतिहास
पीएचसी अलसीगढ़ की स्थापना: 25 सितम्बर 2018
पेराफेरी के गांव: अलसीगढ़, पीपलवास, आड़ा, कालीवास, केली, गोराणा की नाल समेत कई गांव।
किराए का सफाई कर्मचारी
विभागीय उपेक्षा ही कहेंगे कि पीएचसी में चिकित्सक का पद रिक्त है। इसी तरह फार्मासिस्ट व प्रसाविका का एक पद, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, लेखा सहायक, कम्प्यूटर ऑपरेटर, वार्ड बॉय एवं सफाई कर्मचारी जैसे सभी पद रिक्त हैं। केवल चार जनों के स्टाफ के भरोसे पूरी पीएचसी संचालित है। खास यह है कि सफाई कार्मिक भी यहां किराए की सेवाएं दे रहा है।
लैब है टेक्निशियन नहीं
उपचार के नाम पर पीएचसी भवन को आधुनिक चोला पहनाया गया है। लेकिन, टेक्निशियन जैसा महत्वपूर्ण पद यहां खाली है। ऐसे में पीएचसी पर 40 तरह की मिलने वाली नि:शुल्क जांच सेवाएं प्रभावित है। इतना ही नहीं चिकित्सक की सलाह पर मरीज को जांच कराने के लिए उदयपुर जाना होता है। उसके अगले दिन जांच कराकर रिपोर्ट लानी होती है। तब कहीं जाकर तीसरे दिन चिकित्सक स्तर पर मरीज का आवश्यक उपचार शुरू हो पाता है।
365 दिन और मात्र 69 प्रसव
खामी ही कहेंगे कि शहर मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर स्थित इस पीएचसी में बीते 365 दिन के दौरान महज 69 प्रसव ही संभव हुए हैं। सुविधा की कमी भी इसके लिए कुछ हद तक जिम्मेदार बनी हुई है। छितरी आबादी की मुख्य मार्ग से करीब 5 किलोमीटर की दूरी के बावजूद केंद्र में रोगी वाहन 104 और 108 जैसी सुविधाएं ग्रामीणों को मुहैया नहीं हो रही। पीएचसी पर जेनरेटर और इन्वर्टर जैसी सुविधा भी नहीं है।
सक्रिय हैं झोलाछाप
पीएचसी के हालात किसी से छिपे हुए नहीं है। ऐसे में अलसीगढ़ स्वास्थ्य केंद्र के तहत आने वाले गांवों में झोलाछाप डॉक्टर्स का समूह सक्रिय है। क्लीनिक की आड़ में अधिकांश झोलाछाप पूरा हॉस्पिटल चला रहे हैं। मजबूरी में सरकारी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण अवैध क्लीनिकों पर सेवाएं ले रहे हैं। इसके अलावा झोलाछापों की ओर से डोर-टू-डोर उपचार जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं।
कई बार लिखा
पीएचसी पर चिकित्सक, स्टाफ सहित संसाधनों का अभाव है। पंचायत स्तर पर विभाग को लिखित में कई बार समस्या बहाली के लिए लिखा जा चुका है, लेकिन सभी प्रयास बेनतीजा रहे।
आशा कटारा, सरपंच, ग्राम पंचायत, अलसीगढ़
करेंगे कुछ बेहतर
पीएचसी पर स्टाफ की कमी है। इसमें कोई शक नहीं है। चिकित्सक छुट्टी पर है। उसे पाबंद किया जाएगा। आगामी दिनों में बेहतर प्रयास के साथ स्टाफ की नियुक्ति करेंगे। medical and health department चिकित्सकों की कमी तो पूरे जिले में बनी हुई है।
डॉ दिनेश खराड़ी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, उदयपुर





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