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80 फीसदी बाइकर्स करते हैं बिना हेलमेट सफर

जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बावजूद लोग शहर में हेलमेट के इस्तेमाल को लेकर बेपरवाह हैं। लगभग 60 फीसदी दुपहियावाहन चालकों के पास अब भी हेलमेट ही नहीं है, वहीं जिन 40 फीसदी के पास है, उनमें से आधे भी इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं।
एक अनुमान के मुताबिक सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में बाइक सवार उन लोगों की तादाद सबसे ज्यादा होती है, जिन्होंने हेलमेट नहीं लगाया। भारत में रोजाना 98 दुपहियावाहन यानि वर्षभर में करीब 36 हजार सवार इसी वजह से मौत का शिकार हो जाते हैं। इनमें से 66 प्रतिशत तेज गति से वाहन चलाने के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुए, इनमें से 42 प्रतिशत वे होते हैं, जो पीछे की सीट पर बिना हेलमेट बैठते हैं।
हेलमेट रिपेयरिंग करने वाले धौलपुर हाल उदयपुर निवासी दाऊदयाल छींपा बताते हैं कि लोग हेलमेट खरीद तो लेते हैं, लेकिन उसका उपयोग करने में बोझ समझते हैं। हेलमेट धूल मिट्टी, धूप, सर्दी, बारिश से बचाव तो करता ही है, सिर की सुरक्षा भी करता है। पुलिस खुद कानून के तहत लोगों पर दबाव इसलिए ही डालती है, ताकि वे अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट के उपयोग को आदत में लाएं।

एक बार टूटा तो रख देते हैं एकतरफ
एक रोचक तथ्य यह भी सामने आया कि 50 फीसदी लोगों को यह भी पता नहीं कि हेलमेट का कोई भी हिस्सा टूटने के बाद रिपेयर भी हो सकता है। स्क्रीन टूटने, धुंधली होने, अन्दर का कपड़ा गंदा या खराब होने, क्लिप टूटने, नट-बोल्ट खुल जाने या और कोई खराबी होने पर कई बार लोग उसे घर में एकतरफ रख देते हैं। जिन्हें पता होता है, वे छोटी-मोटी टूट-फूट या खराबी ठीक करवाकर उनका उपयोग फिर से करते हैं।

गुणवत्ता पर देने लगे जोर
हेलमेट विक्रेता बताते हैं कि एक सकारात्मक पहलू यह है कि अब लोग गुणवत्तायुक्त हेलमेट खरीदी पर ज्यादा जोर देते हैं। पहले लोग महज चालान से बचने के लिए 200 रुपए तक का हेलमेट खरीद लेते थे। अब बाजार में उपलब्ध 500 से 5000 रुपए तक के हेलमेट भी लोग खरीदने लगे हैं।
शहर में रोज बिकते हैं 400 हेलमेट
उदयपुर में लगभग साढ़े तीन लाख दुपहिया वाहन हैं। हेलमेट की 10 दुकानें हैं और विभिन्न इलाकों में करीब 12 ठेले वाले भी हेलमेट बेचते हैं। एक अनुमान के मुताबिक शहर में रोजाना 400 हेलमेट रोज बिकते हैं।
तकनीक से लैस हुए हेलमेट
बाइक चलाते हुए मोबाइल पर बात करने या गाने सुनने की आदत को सुविधाजनक बनाने के लिए अब निर्माता कम्पनियों ने इनबिल्ड ब्लूटूथ और इयरप्लग लगे हेलमेट उतारे हैं। जो गुणवत्ता के साथ ही मोबाइल के हैण्डफ्री इस्तेमाल की सहूलियत देते हैं। कई आकर्षक मॉडल, रंग व डिज़ाइन में भी उपलब्ध हैं।
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सरकार कानून के स्तर पर अपना काम करती है, लेकिन समाज को भी जागरूक होना पड़ेगा। बदलती आवश्यकताओं के मद्देनजर हेलमेट में तकनीक जोड़ी जा रही है। जनजागरण गतिविधियों से मानसिकता को बदलने की कोशिश की जा रही है।
वीरेन्द्र सिंह राठौड़, सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ

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