अलवर. निकाय चुनाव में राज्य सरकार के नए नियम शहरों में सरकार बनाने के सपना संजो रहे राजनीतिक दलों को भारी पड़ सकता है। नए नियम में सरकार ने इस बार निकाय प्रमुख के नामांकन के बाद पांचवें दिन मतदान का कार्यक्रम निर्धारित कि या है। नामांकन से मतदान के बीच यही पांच दिन का अंतराल राजनीतिक दलों की तैयारियों पर पानी फेर सकता है।
जिले में अलवर, भिवाड़ी व थानागाजी निकायों के मुखिया के लिए गुरुवार को नामांकन हो चुका है। अब इन निकायों में सभापति व अध्यक्ष पद के लिए मतदान 26 नवम्बर को होगा। राजनीतिक दलों की परेशानी यह है कि पांच दिनों तक पार्षदों व सर्मथन देने वाले निर्दलीय पार्षदों को कैसे रोका जाए। पूर्व में निकाय प्रमुख के चुनाव में नामांकन के बाद मतदान के लिए इतना समय नहीं दिया जाता था।
पांच दिन में बदल सकता है चुनावी गणित
निकाय प्रमुख चुनाव के लिए कांग्रेस व भाजपा ने अपने-अपने पार्षदों के साथ बहुमत के लिए कुछ निर्दलीयों का भी समर्थन जुटाने का दावा किया है। दोनों ही दलों ने निकाय के मुखिया के लिए प्रत्याशी भी घोषित कर दिए हैं। अब राजनतिक पार्टियों को मतदान में अपना बहुमत भी साबित करना है। इसके लिए अपने व समर्थन देने वाले सभी पार्षदों को एकजुट रखना जरूरी है, लेकिन वर्तमान हालात में किसी भी दल के लिए आसान काम नहीं है। इसका कारण है कि पार्षदों का गणित बदलने में कांग्रेस व भाजपा के रणनीतिकार जुटे हैं। पार्षदों का चुनावी गणित हर दिन बदल भी रहा है, ऐसे में प्रमुख पार्टियों के रणनीतिकारों को पांच दिन तक पार्षदों को अपने प्रत्याशी के पक्ष में रखने में पसीने छूट रहे हैं। गुरुवार को ही भाजपा के खेमे से तीन निर्दलीय पार्षद दूसरे खेमे में चले गए। इससे भाजपा के पार्षदों का गणित गड़बड़ा गया। वहीं अब भी कांग्रेस व भाजपा को अपने-अपने खेमे के पार्षदों के टूटने का खतरा सता रहा है।
बाड़ाबंदी कर दूसरे स्थानों पर भेजा
निकाय के मुखिया के चुनाव से पहले पार्षदों की संख्या में कोई बड़ा फेरबदल नहीं हो, इसके लिए कांग्रेस व भाजपा ने अपने-अपने दलों के पार्षदों समेत समर्थन देने वाले निर्दलीय पार्षदों को अलवर से बाहर अन्य दूरस्थ स्थानों पर भेज दिया है, जिससे प्रतिद्वंदी दल के रणनीतिकार उनकी रणनीति में सेंध नहीं लगा सकें।
यह है बहुमत का जादुई आंकड़ा
निकाय के मुखिया के चुनाव में अलवर नगर परिषद में जादुई आंकड़ा 33, भिवाड़ी में 31 तथा थानागाजी में 13 है। हालांकि तीनों ही निकायों में कांग्रेस व भाजपा इस जादुई आंकड़े से ज्यादा पार्षदों के बहुमत का दावा कर रही हैं, लेकिन चिंता दोनों ही खेमों में बराबर है।
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