अलवर. निकाय चुनाव में सभापति व अध्यक्ष पद के चुनाव में बहुमत के दावों के बाद भी भाजपा जिले के तीन निकायों में से एक में भी अपना बोर्ड नहीं बना पाई। जिले के ज्यादातर निकायों में भाजपा के दावों की हवा निकलने के पीछे क्रॉस वोटिंग भी बड़ा कारण रही। निकाय चुनाव में अलवर नगर परिषद के परिणाम ने सबसे ज्यादा चौंकाया। यहां नम्बर गेम में भाजपा कांग्रेस से आगे रहने के बाद भी चुनाव परिणाम में कांग्रेस से बड़े अंतर से पिछड़ गई। भाजपा नगर परिषद में मतदान के लिए अपने साथ 34 पार्षदों को लाई, लेकिन केवल 28 वोट ही मिले। यानि भाजपा प्रत्याशी को उनके खेमे के 6 पार्षदों ने वोट नहीं दिया, बल्कि कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर दी।
क्रॉस वोटिंग करने वाले कौन?
भाजपा खेमे से कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले पार्षद आखिर कौन थे? आशंका जताई जा रही है कि क्रॉस वोटिंग संभवत: भाजपा के ही पार्षदों में से हुई हो।
चर्चा 10 के क्रॉस वोटिंग की
भाजपा खेमे से 6 पार्षदों की ओर से क्रॉस वोटिंग के साथ ही पार्टी से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि इसका आंकड़ा 6 के बजाय 10 तक पहुंच सकता है। ऐसे लोगों का कहना है कि क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते भाजपा ने भी कांग्रेस खेमे से 4 पार्षदों की क्रॉस वोटिंग कराने के प्रयास किए थे। यदि ये प्रयास सफल रहे तो भाजपा खेमे से क्रॉस वोटिंग करने वाले पार्षदों का आंकड़ा 10 तक पहुंच सकता है। हालांकि अभी कांग्रेस से 4 पार्षदों की क्रॉस वोटिंग हो पाई या नहीं, इसका पूरी तरह खुलासा अभी नहीं हो पाया है।
क्रॉस वोटिंग करने वाले चिह्नित नहीं
भाजपा खेमे से क्रॉस वोटिंग करने वाले पार्षदों के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। भाजपा खेमे के सभी 34 पार्षद उनके शिविर में हैं। सरकार की ओर से कुछ पार्षदों के परिजनों पर दवाब डाला गया। इससे भी क्रॉस वोटिंग को बढ़ावा मिला। क्रॉस वोटिंग करने वालों का पता लगाया जाएगा।
संजयसिंह नरूका
जिलाध्यक्ष, भाजपा अलवर





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