उदयपुर/ सेमारी. human story बाबूल की बगिया में कभी उसकी खुशबू से उसकी उपस्थिति का अहसास होता था। कलाई पर राखी बांधकर वह भी औरों की तरह भाइयों की दीर्घायु की दुआ करती थी। उसके बचपन का वह चुलबुलापन कभी पीहर के परिवारजनों के कानों में गंूजता है, लेकिन उसकी एक कथित गलती ने उसे अपनों से इतना दूर कर दिया कि मरने के बाद भी वह उसे गले लगाने से हिचकते रहे। इतना ही नहीं उसके शव को अंतिम कंधा देने से भी अपनों ने इनकार दिया। बात यहां भी खत्म नहीं होती। जीतेजी जिन ससुराल के लोगों ने उसे अपना नहीं माना। वह मरने के बाद मोक्ष मार्ग में भी उसके लिए बाधा बने रहे। युवती की मौत के बाद भी उनकी निष्ठुरता बनी रही। बस कहने को दो बहनें ही थी, जो बहन का शव लेकर कभी पीहर तो कभी ससुराल में डोलती रही। हद तो तब हो गई, जब जिम्मेदारों की इस निष्ठुरता को पुलिस भी केवल आंखों से देखती रही। जी हां! हम बात कर रहे हैं सेमारी थाना क्षेत्र की धारेटा निवासी उस गीता मीणा की, जिसने करीब 10 साल पहले बाबूल की बगिया छोड़कर ओड़ा निवासी मोतीलाल को जीवनसाथी बनाने का फैसला किया था। बस यही गलती उसके लिए श्राप बन गई। उसकी इस गलती से खफा पीहर पक्ष ने उसका साथ हमेशा के लिए छोड़ दिया तो गैर सामाजिक तरीके से मोतीलाल के साथ रहने वाली गीता को ससुराल पक्ष ने भी स्वीकार नहीं किया। इस बीच गीता के एक पुत्र भी हुआ। करीब 3 साल बाद गीता ने मोतीलाल को भी छोड़ दिया और पुत्र के साथ डूंगरपुर में रहने लगी। पुत्र को उसने हॉस्टल में रखवा दिया। मुसीबत के पलों में और गीता की अकेली जिंदगी में उसे केवल दो बहनों का ही सहारा मिला। इधर, मोतीलाल भी दुनिया से चल बसा, लेकिन मौत का समाचार सुनकर भी गीता ससुराल नहीं पहुंची। बस यहीं से उसकी बदनसीबी शुरू हो गई। ससुरालवालों ने उससे हमेशा के लिए रिश्ता खत्म कर दिया। वहीं 26 नवम्बर को गीता की भी तबीयत ने झोल खाया। बीमारी में वह उसकी बहनों के पास गई। बहनों ने उसकी खराब हालत देख डूंगरपुर चिकित्सालय में भर्ती कराया। वहां से चिकित्सकों ने उसे उदयपुर रैफर किया, लेकिन गीता से उसकी जिंदगी भी रूठ चुकी थी। बीच रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। मजबूर बहनों ने पीहर पक्ष को इसकी सूचना दी, लेकिन पीहर के लोगों ने शव को लेकर उदासीनता दिखाई। सेमारी थानाप्रभारी श्यामसिंह चारण मय जाप्ता मौके पर पहुंचे। परिजनों ने शव को ओड़ा गांव में मोतीलाल के घर ले जाने की बात कही। इस पर थाना प्रभारी और एएसआई लालचंद्र मीणा शव के साथ ओड़ा पहुंचे। वहां पुलिस ने मोतीलाल के भाई हरीश एवं बूढ़ी मां को शव की जानकारी देते हुए अंतिम संस्कार कराने की अपील की। इस पर हरीश ने मोतीलाल की मौत पर गीता के नहीं आने की बात कहते हुए जिम्मेदारी से इनकार कर दिया। मामले में पुलिस ने स्थानीय मौतबीरों से भी न्याय मांगा, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। इस बीच ससुराल में पड़े शव के पास गीता की बहन और मोतीलाल की बूढ़ी मां बैठे हुए विलाप करती रही। बुधवार सुबह पुलिस ने सख्ती दिखाई और पीहर और ससुरालजनों की बैठक बुलाकर शव का निस्तारण कराने के प्रयास किए। human story तब कहीं जाकर दोनों पक्षों ने शव का अंतिम संस्कार कराया।





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