उदयपुर/ कोटड़ा. kuposhan problem जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की हालत में सुधार को लेकर जिला प्रशासन के स्तर पर किए जा रहे प्रयास स्थानीय ग्रामीणों में जागरूकता की कमी के बीच विफल होते दिख रहे हैं। हालांकि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और चिकित्सा विभाग के कार्मिक इस अभियान को हर संभव सफल बनाने में लगे हैं। सामने आ रहे मामलों की तस्वीर तो कुछ ऐसे ही हालात बयां कर रही है। बात कोटड़ा क्षेत्र में समुदाय आधारित कुपोषण निवारण अभियान के तहत आयोजित शिविर की है। शिविर के दौरान सभी विभागों के सामूहिक प्रयासों से अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने के साथ उन्हें आवश्यक उपचार एवं सुविधाओं के लिए चिकित्सालय लाया जा रहा है। लेकिन, अज्ञानता के बीच कुछ परिजन उनके बच्चों को चिकित्सालय तक लाने से कतरा रहे हैं। इसके चलते उदयपुर शहर की गलियों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अलावा चिकित्सा विभाग के कर्मचारी लुकाछिपी का खेल कर रहे हैं। यह खेल स्वेच्छा से नहीं बल्कि मजबूरी में हो रहा है।
हुआ यूं कि क्षेत्र में लगाए गए शिविर में मेडिकल टीम ने वागावत ग्राम पंचायत के वेरा कातरा निवासी जीगा (2) पुत्र भोलिया खैर को अतिकुपोषित बच्चों की सूची में डालते हुए उसे उदयपुर के गीतांजलि हॉस्पिटल रेफर किया। यहां मजबूरी में रात करीब 10 बजे एंबुलेंस के चिकित्सालय परिसर पहुंचते ही बच्चे का नाना कानिया उस जीगा को लेकर छिप गया। एंबुलेंस ड्राइवर एवं आशा के पति ने करीब 2 घंटे तक उनकी तलाश की। इसके बाद आस्था संस्थान की टीम श्याम एवं कर्मचारियों ने चेतक सर्कल पर बैठे हुए बच्चे एवं नाना को ढूंढ निकाला, जो कि कोटड़ा जाने के लिए साधन का इंतजार कर रहे थे। टीम ने बच्चे एवं उसके नाना को फिर से एंबुलेंस की मदद से चिकित्सालय पहुंचाया। दूसरी ओर बच्चों के परिजन स्थानीय ग्राम विकास अधिकारी एवं अन्य स्टाफ पर भी नाराजगी दर्शाते रहे।
विकास अधिकारी के निर्देश
विभागीय कायदा है कि रेफर होने वाले कुपोषित बच्चों के साथ उनके माता-पिता का होना जरूरी है। बच्चा चोरी होने की आशंकाओं के बीच अभिभावक प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। कई मामलों में तो मेडिकल टीम के लोगों को वीडियो कॉलिंग के माध्यम से बच्चे के चिकित्सालय में होने के प्रमाण भी देने पड़ रहे हैं। इस गंभीरता को देखते हुए स्थानीय विकास अधिकारी धनपतङ्क्षसह ने रेफरल वाले मामले को गंभीरता से लेते हुए पंचों और मौतबिरों, भोपा पटेलों व वार्डपंच को बुलाकर पूरी सहमति के बाद बच्चों को उदयपुर रवाना करने के निर्देश दिए। शिविर के माध्यम से अब तक कोटडा क्षेत्र से कुल 51 बच्चों को रेफर किया जा चुका है। इन बच्चों में हीमोग्लोबीन, कैल्शियम एवं कमजोर लीवर जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। kuposhan problem जिला अस्पताल में इन बच्चों को नि:शुल्क उपचार हो रहा है।





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