अलवर. वन्यजीवों से पहले खुद सरिस्का बाघ परियोजना को सुरक्षा की दरकार है। सरिस्का की सुरक्षा के लिए स्वीकृत अधिकारियों व कर्मचारियों के करीब आधे पद खाली हैं। सबसे ज्यादा वनकर्मियों का टोटा है, इस कारण सरिस्का में वनकर्मियों को कई बार लगातार दिन-रात ड्यूटी करने की मजबूरी है।
सरिस्का बाघ परियोजना देश के प्रमुख नेशनल पार्क में शुमार है। करीब 1213 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सरिस्का बाघ परियोजना की सुरक्षा के लिए 350 से ज्यादा वनकर्मियों की जरूरत है। वहीं सुरक्षा में तैनात वन अधिकारियों की संख्या भी बढ़ाना जरूरी है।
वीपी सिंह कमेटी पूर्व में दे चुकी सुझाव
वर्ष 2005 में राज्य सरकार की ओर से गठित वीपी सिंह कमेटी ने सरिस्का में बाघ संरक्षण, मॉनिटरिंग, शिकार पर रोक सहित अन्य सुझाव दिए थे, लेकिन करीब 14 साल बाद भी रिपोर्ट पर अमल नहीं हो सका, नतीजतन वर्ष 2018 के सर्वे में सरिस्का की रेटिंग लुढक गई। वर्ष 2005 में सरिस्का में बाघों के सफाए के कारणों की जांच एवं इस पर रोक के लिए सुझाव देने के लिए राज्य सरकार ने तत्कालीन सांसद वीपी सिंह की अध्यक्षता में स्टेट एम्पावर्ड कमेटी ऑन फोरेस्ट एण्ड वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट का गठन किया गया था। कमेटी ने सरिस्का में बाघों के शिकार, जंगल में शिकारियों की आसान पहुंच एवं सरिस्का के बाघ विहीन होने के कारणों की जांच कर सरकार को सुझाव दिए थे।
सरिस्का में वनरक्षकों, वनपाल सहित अन्य वन अधिकारियों की संख्या बढ़ाने का सुझाव भी कमेटी ने दिया था। वर्ष 2005 में सरिस्का के 881 वर्ग किलोमीटर की 75 बीटों के लिए 225 वन रक्षकों की जरूरत बताई थी। वर्तमान में सरिस्का का क्षेत्रफल बढकर 1213 वर्ग किलोमीटर और बीटों की संख्या 102 हो गई है। इस लिहाज से वर्तमान में सरिस्का में करीब 350 वन रक्षकों की जरूरत है। कमेटी ने सुरक्षा में लगे वनकर्मियों को 45 साल की उम्र होने के बाद इस जिम्मेदारी से मुक्त करने का सुझाव भी दिया था।
वर्तमान में यह है सरिस्का की नफरी
पद स्वीकृत पद वर्तमान स्थिति
सीसीएफ- 1 1
डीसीएफ- 2 2
एसीएफ= 6 3
रेंजर 11 10
वनपाल व सहायक वनपाल 46 28
वन रक्षक 140 80
होमगार्ड व वर्कचार्ज कर्मियों से चला रहे काम
सरिस्का में वर्तमान में 110 होमगार्ड व करीब 60 वर्कचार्ज कर्मी कार्यरत है। वनरक्षकों की कमी के चलते सरिस्का प्रशासन होमगार्ड व वर्कचार्ज कर्मियों से सुरक्षा व्यवस्था का काम चलाने को मजबूर हैं।
कई बार अवगत करा चुके
सरिस्का में वनरक्षकों व अन्य वनकर्मियों की कमी को लेकर पूर्व में कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
सेढूराम यादव
डीएफओ सरिस्का बाघ परियोजना
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