उदयपुर/ नवानिया. human story निज स्वार्थ से घिरी 'इंसानियतÓ जीवों की जिंदगी के लिए निरंतर खतरा बनती जा रही है। लेकिन, इंसानियत के रखवालों की भी इस दुनिया में कमी नहीं है। मानवता का पर्याय बने कुछ युवाओं ने जीव सुरक्षा की राह पर चलते हुए एक बेजुबान कछुए की जिंदगी को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 'इंसानियत को खूंटी पर टांगकर खुद की परवाह करने वाले इंसानोंÓ की कहावत को चरितार्थ करने वाली ये घटना नवानिया के माजरा तालाब की है। यहां मत्यस्याखेट की मंशा से आए कुछ युवाओं ने मछली पकडऩे की चाह में कांटा डाला। दुर्भाग्य से मछली तो हाथ नहीं आई और कांटे में कछुआ फंस गया। यह देख शिकारी युवा मौके पर कछुए को यथाहाल तालाब में छोड़कर चले गए। उसके मुंह पर कांटा और तार फंसा रह गया। मुंह में फंसे काटे के बीच कछुए का खाना-पीना दुश्वार हो गया। इस बीच गांव का धर्मेश रांका और उसके साथी तालाब पर नहाने गए। तभी तड़पता हुआ कछुआ पानी से बाहर आता दिखा। बेजुबा कछुए को देखकर धर्मेश ने उत्सुकता दिखाई और उसके नजदीक गया। कछुए के मुंह पर रक्त स्त्राव देख धर्मेश ने जीव को बचाने का मानस बनाया और साथी लालजी आमेटा के साथ कछुए को लेकर नवानिया स्थित पशु चिकित्सालय लेकर गया। युवाओं ने कछुए की कहानी पशु चिकित्सक को बताई। जवाब में पशुचिकित्सक ने ऑपरेशन करने की बात कही। करीब एक घंटे के ऑपरेशन के बाद पशु चिकित्सक ने कछुए को नई जिंदगी दी। चार घंटे बाद कछुए को होश आने के बाद युवा उसे गांव ले गए। वहां पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद युवाओं ने कछुए को फिर से तालाब में छोड़ा। human story इतना ही नहीं जीव पीड़ा को समझते हुए युवाओं ने ग्रामीणों से तालाब में प्लास्टिक नहीं डालने और नुकीली चीजों को पानी में नहीं डालने की अपील भी की।
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