उदयपुर/ फलासिया. medical and health department गुजरात सीमा से सटी संभाग मुख्यालय उदयपुर की सीमा में बसे जिले के ग्रामीणों से स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर 'सौतेला व्यवहारÓ हो रहा है। सरकारी अनदेखी के बीच मरीजों को सुविधा के नाम पर दुविधा का सामना करना पड़ रहा है। फलासिया पंचायत समिति की अंतिम ग्राम पंचायत सीमा पर स्थापित पानरवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति को देखकर ऐसा कहना गलत भी नहीं होगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमे की अनदेखी के चलते सीमावर्ती डैया, अंबासा तक के ग्रामीणों को उपचार के लिए गुजरात की ओर रूख करना पड़ता है। या फिर मजबूरी में झोलाछापों की शरण लेनी पड़ती है। कहने को स्वास्थ्य केंद्र पर दो चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन सेवा के नाम पर एक मात्र चिकित्सक यहां सेवाएं दे रहा है। लोगों की मांग पर एक बार यहां पर संविदा पर चिकित्सक लगाने का भी दावा किया गया, लेकिन यह ताना-बाना ज्यादा दिन नहीं चल सका। एक चिकित्सक के भरोसे संचालित सेवाओं के बीच निजी कारणों के बीच चिकित्सक की अनुपस्थिति यहां के मरीजों के लिए कभी कभार बड़ी मुसीबत बन जाती है। कई मौकों पर यहां आने वाले मरीजों को चिकित्सक की अनुपस्थिति जानकर निराश लौटना पड़ता है।
पड़ौसी राज्य पर भरोसा
केंद्र और प्रदेश सरकार की ढेरों चिकित्सा योजनाएं भी बॉर्डर के इन इलाकों में ग्रामीणों को लुभाने में समर्थ होती नहीं दिख रही। यही कारण है कि प्रदेश की सीमा में रहते हुए भी यहां के ग्रामीण उपचार के लिए गुजरात राज्य के समीपवर्ती स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों पर भरोसा ज्यादा करते हैं। गुजरात की चिकित्सा सुविधाएं उन्हें सहज और सुलभ भी लगती हैं। स्थानीय सरकारी अस्पताल तो उन लोगों के लिए मजबूरी है, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेना होता है। बता दें कि जांच सुविधा के बावजूद यहां व्यवस्था संचालन के लिए लैब टैक्निशियन नहीं है।
दिखावे का रोगी वाहन
पानरवा पीएचसी पर प्रसूता और मरीजों के लिए सुविधा के लिए रोगी वाहन 104 की सुविधा है, लेकिन यह किसी छलावे से कम नहीं। रोगी वाहन पूरी तरह खटारा हो चुका है। अधिकांश मौकों पर यह रोगी वाहन बीच रास्तों में खड़ा दिखाई देता है। ग्रामीणों की ओर सुविधा के नाम पर रोगी वाहन 108 की मांग की गई है।
अस्पताल की जमीन पर कब्जा
मौका पड़ताल के दौरान कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पीएचसी परिसर की बहुत सी जमीन पर अतिक्रमियों की ओर सेे कब्जा किया हुआ है। इस कारण मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच परिसर संकरा होता जा रहा है।
24 घंटे की ड्यूटी
रिक्त पद पर अतिरिक्त चिकित्सक की नियुक्ति को लेकर उच्चाधिकारियों को बताया हुआ है। मैं अकेला 24 घंटे ड्यूटी कर रहा हूं। निजी कारणों से चिकित्सालय छोडऩे के दौरान मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
डॉ. मुकेश गरासिया, चिकित्सा प्रभारी पानरवा
हर स्तर पर प्रयास
पानरवा में रिक्त चिकित्सक पद को भराने के लिए मेरे स्तर पर निरंतर प्रयास जारी हैं। जिला स्तरीय अधिकारियों को लिखित और मौखिक तौर पर जानकारी दी हुई है। चिकित्सालय परिसर में काबिज अवैध कब्जाधारियों को हटवाने की कार्रवाई होगी।
डॉ. धर्मेन्द्र गरासिया, बीसीएमओ, झाड़ोल
फिर से बताएंगे
पानरवा ग्रामीणों की समस्या और चिकित्सक की कमी के लिए चिकित्सा मंत्री को बता चुके हैं। medical and health department एक बार फिर से उन्हें इस बारे में जानकारी दी जाएगी।
नारायण जन्नावत, ब्लॉक अध्यक्ष, झाड़ोल कांग्रेस





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