अलवर. निकाय चुनाव में शहर की सरकार बनने की तस्वीर साफ होने के बाद अब सबकी जुबां पर एक ही सवाल है आखिर अलवर नगर परिषद में किसका बनेगा बोर्ड एवं कौन होगा बोर्ड का खेवनहार (चेयरमैन) ? किसी भी दल ने चेयरमैन को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि इस बार चुने गए पार्षदों में भाजपा का पलड़ा भारी है, लेकिन कांग्रेस भी मैदान छोडऩे को तैयार नहीं है। वैसे भाजपा व कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता बोर्ड बनाने के लिए अपने साथ बहुमत होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन बुधवार को दिन भर दोनों ही दलों के नेता बहुमत का जुगाड़ करने में व्यस्त रहे।
शहर की सरकार बनने की घड़ी अब नजदीक आ चुकी है, चेयरमैन पद के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और गुरुवार को यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। राजनीतिक पार्टियां ही नहीं, सभी की नजर अब नगर परिषद बोर्ड गठन पर टिकी है। इसमें भी सबसे ज्यादा उत्सुकता इस बात को लेकर है कि आखिर बोर्ड किस दल का बनेगा। इस बार नगर परिषद अलवर के चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और मतदाताओं ने शहर की सरकार के गठन की चाबी निर्दलियों को सौंपी है। लोगों की दिलचस्पी इस बात में ज्यादा है कि निर्दलियों का समर्थन जुटाने में कौनसी पार्टी सफल अभी तक बाजी मार चुकी है।
दावा बहुमत का, फिर भी सता रही चिंता
निकाय चुनाव में भाजपा व कांग्रेस दोनों ही पार्टी बहुमत का इंतजाम होने का दावा कर रही हैं, लेकिन दोनों ही दलों के नेताओं को बोर्ड बनाने के लिए जादुई आंकड़े का जुगाड़ करने की चिंता सता रही है।
यह है निकाय चुनाव का गणित
अलवर नगर परिषद चुनाव में अलवर में भाजपा के 27, कांग्रेस के 19 व निर्दलीय 19 पार्षद जीते हैं। बोर्ड बनाने के लिए 33 पार्षदों का बहुमत जरूरी है।
दोनों का ये दावा
अलवर नगर परिषद चुनाव के लिए भाजपा अपने 27 पार्षदों के अलावा 12 से 15 निर्दलीय पार्षदों के सहयोग का दावा कर रही है। वहीं कांग्रेस भी अपने 19 पार्षदों के अलावा 10 से ज्यादा निर्दलीय पार्षदों के सहयोग का दावा कर रही है। वैसे दोनों ही दलों के नेता बुधवार को भी निर्दलीय पार्षदों का जुगाड़ करते दिखे।
अलवर में भाजपा नगर परिषद बोर्ड के लिए वैश्य वर्ग के किसी पार्षद पर दांव लगा सकती है। फिलहाल भाजपा पार्षद रविन्द्र कुमार जैन व अरुण जैन के नामों की चर्चा ज्यादा है। इसका कारण रविन्द्र जैन की पूर्व विधायक रामहेत यादव से निकटता बताई जा रही है। जबकि अरुण जैन को शहर के व्यापारी वर्ग का समर्थन बताया गया है। इसके अलावा भाजपा में वैश्य वर्ग के किसी पुराने पार्षद या किसी अन्य वर्ग के पार्षदों पर भी दांव खेला जा सकता है।
अलवर में सभापति पद को लेकर इंतजार की रणनीति अपनाए हुए है। पार्टी नेता अपने 19 पार्षदों सहित कुछ निर्दलीय पार्षदों को रिसोर्ट में ठहराए हुए है, लेकिन सभापति के प्रत्याशी को लेकर फिलहाल मौन है।
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