कोटा. देश के नामचीन कवियों को दशहरा मेले में बुलाकर पूरे कोटा ने रात-रात भर कविताएं सुनी, लेकिन बारी जब उनका मानदेय देने की आई तो नगर निगम के अफसरों ने 'खाली लिफाफाÓ थमा इन्हें कोटा से रवाना कर दिया। राजस्थानी कवि सम्मेलन, अटल राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में आए यह कवि अब अपने भुगतान के लिए नगर निगम के अधिकारियों को फोन खटखटा रहे हैं तो अफसरों ने इनके फोन तक उठाने बंद कर दिए हैं।
कवि सम्मेलनों के लिए राष्ट्रीय फलक पर खास पहचान कायम करने वाला कोटा का राष्ट्रीय दशहरा मेला इस बार घनघोर अराजकताओं की भेंट चढ़ गया। ऊंची कीमतों पर कलाकारों को बुलाए जाने के फैसलों से लेकर अधजले रावण तक की घटनाओं के कारण कोटा को देश भर में शर्मशार होना पड़ा। इतना ही नहीं दशहरा मेला खत्म होने के बाद भी विवाद अभी तक आयोजकों का दामन नहीं छोड़ रहे।
अब तक नहीं दिया मानदेय
कोटा दशहरा मेला की अब तक की परंपरा रही है कि तीनों कवि सम्मेलनों में आमंत्रित किए गए सभी कवियों के मानदेय का हाथों हाथ भुगतान किया जाता है। यही वजह है कि देश भर के नामचीन कवि विजयश्री रंगमंच पर आकर कविता पाठ करने को अक्सर राजी हो जाते हैं, लेकिन इस बार अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में आए जगदीश सोलंकी, विष्णु सक्सेना, सोम ठाकुर और सत्यनारायण सत्तन समेत अधिकांश कवियों को नगर निगम प्रशासन एक पखवाड़े बाद भी काव्य पाठ के मानदेय का भुगतान नहीं कर सका है।
सभी को है इंतजार
नगर निगम ने 19 अक्टूबर को आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के साथ साथ 10 अक्टूबर को हुए अटल राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और 12 अक्टूबर को विजयश्री रंगमंच पर ही आयोजित किए गए राजस्थानी कवि सम्मेलन में भी कविता पाठ करने कोटा आए अधिकांश कवियों के मानदेय का भी अभी तक भुगतान नहीं किया है। जिससे देश भर के कवियों में खासा रोष है।
फोन तक नहीं उठा रहे अफसर
प्रख्यात कवि मुकुट मणिराज ने बताया कि पहली बार ऐसा हुआ है कि कोटा दशहरा मेले में आयोजित कवि सम्मेलन में शामिल हुए कवियों को मानदेय के भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ा है। दुखद बात यह है कि भुगतान के बारे में जब नगर निगम के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कई दिनों तक आज कल करके टालना शुरू कर दिया और अब तो हद यह हो गई है कि किसी भी कवि का फोन तक नहीं उठा रहे। इस तरह के व्यवहार से ऐतिहासिक दशहरा मेला ही नहीं पूरे कोटा की छवि देश भर में खराब हो रही है। जो बेहद शर्मनाक है।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में आए कवियों की बात तो छोडि़ए अभी तक मेले में हुए सबसे पहले राजस्थानी कवि सम्मेलन में शामिल हुए कवियों तक का भुगतान नहीं किया गया है। कवि जगदीश सोलंकी ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि उनका और उनके साथ के अधिकांश कवियों को निगम अधिकारियों ने अभी तक मानदेय नहीं दिया है।
जल्द भुगतान का आश्वासन
कवियों के मानदेय का भुगतान न होने की वजह जानने के लिए जब मेलाधिकारी कीर्ति राठौर से बात की गई तो उन्होंने जल्द ही सभी का भुगतान कराने का आश्वसान दिया। राठौड़ ने बताया कि पहली बार ऑनलाइन पेमेंट किया जा रहा है। ऐसे में जिन कवियों के बैंक एकाउंट नंबर और आईएफएसई कोड में कोई गलती रह गई होगी सिर्फ उन्हीं का भुगतान बाकी बचा है। मेलाधिकारी ने खुद ही इस मामले को प्राथमिकता से दिखवाने और भुगतान न होने की वजह पता कर सभी कवियों का जल्द से जल्द भुगतान कराने का भी आश्वासन दिया।
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